गुरु पूर्णिमा पर भावविभोर हुए अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर, बोले— “वाह पुष्पदंत सागर जी गुरुदेव, क्या तोहफा दिया… हम सोए थे, आपने जगा दिया”
पुष्पगिरी तीर्थ में गुरु-शिष्य परंपरा का अनुपम संगम, विधायक डॉ. राजेश सोनकर ने किया गुरु चरण प्रक्षालन
पुष्पगिरी (सोनकच्छ)।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर पुष्पगिरी तीर्थ गुरु-भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो उठा। गुरु-शिष्य परंपरा के अद्भुत दृश्य ने उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर जी महाराज ने अपने शिष्य अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज को आशीर्वाद देते हुए कहा कि “जो अपने सारे गुणों को शिष्यों के भीतर उतार दे, वही सच्चा गुरु है। गुरु आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त कर जीव को परमात्मा बनने की दिशा देता है।”

गुरुदेव के आशीर्वचनों से भाव-विह्वल हुए अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज ने अपनी विशिष्ट काव्यात्मक शैली में कहा—
“बुझा था, जला दिया… दूर था, बुला लिया…
वाह पुष्पदंत सागर जी गुरुदेव, क्या तोहफा दिया…
हम सोए थे, आपने जगा दिया।”
इन भावपूर्ण शब्दों के साथ ही पूरा पंडाल “गुरुदेव की जय” के जयघोषों से गूंज उठा और वातावरण भक्तिरस से ओत-प्रोत हो गया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज ने कहा कि “अब समय दूसरों को नहीं, अपने कर्मों को पराजित करने का है। मेरे गुरु पुष्पदंत सागर जी महाराज ने मेरा हाथ पकड़कर साधारण ‘पप्पू’ को परम पूज्य बना दिया। जो कुछ भी जीवन में पाया है, वह सब गुरु की असीम कृपा का प्रतिफल है।” उन्होंने बताया कि उन्हें साधना के गुरु आचार्य श्री सम्मति सागर जी महाराज से आजीवन चतुर्दशी तिथि के अखंड उपवास का नियम तथा आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से अष्टमी तिथि के अखंड उपवास का नियम प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि “जीवन में जो खोया वह मेरी नादानी थी, और जो पाया वह गुरु की मेहरबानी है। संसार को प्रकाश देना आसान है, लेकिन स्वयं को प्रकाशित करना सबसे कठिन साधना है।”
प्रवक्ता रोमिल जैन ने बताया कि आयोजन के एक दिन पूर्व पंडित प्रदीप जैन ‘मधुर’ (मुंबई) के मंत्रोच्चार के साथ ध्वजारोहण एवं चातुर्मास-2026 की संपूर्ण धार्मिक विधियां संपन्न हुईं। गुरु सानिध्य में चातुर्मास कलशों की स्थापना भी की गई।
गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल दिव्य मंगल पाठ एवं स्वाध्याय का आयोजन हुआ। इसके पश्चात अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जी, उपाध्याय मुनि पीयूष सागर जी ससंघ ने अपने दादा गुरुदेव गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज का चरण प्रक्षालन कर उनका मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर भगवान मुनिसुव्रतनाथ स्वामी का भव्य कलशाभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई। गणाचार्य श्री के मंगल प्रवचनों के पश्चात श्रद्धालुओं ने संगीतमय गुरु-पूजा कर अष्टद्रव्यों से गुरु चरणों में श्रद्धा अर्पित की।
समारोह में सोनकच्छ विधायक एवं पुष्पगिरी स्वागताध्यक्ष डॉ. राजेश सोनकर ने भी गुरु चरण प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर दूर-दूर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने तीर्थ पहुंचकर गुरु दर्शन एवं वंदना का पुण्य लाभ अर्जित किया।
प्रचार-प्रसार संयोजक रोमिल पाटणी (सोनकच्छ), नरेंद्र अजमेरा एवं पीयूष कासलीवाल (औरंगाबाद) से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312




