मूल संस्कार हमारी प्राचीन परंपरा है जो लुप्त हो रही है योग सागर महाराज
रहली
निर्यापक श्रमण पूज्य मुनिश्री 108 योग सागर महाराज ने संस्कारों के विषय पर उद्बोधन देते हुए कहा कि संस्कारों के बिना मानव जीवन मूल्यहीन हो जाता है। खानपान, वेशभूषा, व्यवहार, धर्म क्रियाओं पर विपरीत असर पड़ रहा है। निश्चित और सही समय मिलने वाले संस्कारों से जीवन संवर जाता है।
महाराज श्री ने कहा कि संस्कारी संतति से धर्म और समाज स्वस्थ परंपरा का संवाहक बनते हैं। मूल संस्कार हमारी प्राचीन







परंपरा है जो लुप्त हो रही है। आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज का जिक्र करते हुए महाराज श्री ने कहा कि कुछ वर्षों पूर्व आचार्य श्री ने बड़े रूप में मूल संस्कार देकर नई पीढ़ी पर उपकार किया था। हम सभी गुरु परंपरा को लेकर ही यह मूल संस्कार देने का कार्य कर रहे हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
