माता-पिता और गुरु जीवन के सबसे बड़े तीर्थ हैं आचार्य श्री विहर्ष सागर महाराज
मदनगंज किशनगढ़
आचार्य श्री 108 विहर्ष सागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में चातुर्मास के लिए मंगल कलश स्थापना महोत्सव आरके कम्युनिटी सेंटर में हुआ। शुरुआत चातुर्मास ध्वजारोहण से हुई। श्रावकों ने आचार्य विहर्ष सागर महाराज के पाद प्रक्षालन किए। मंगलाचरण महावीर मंडल ने प्रस्तुत किया।
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आचार्य विहर्ष सागर महाराज ने कहा, गुरु को नहीं, गुरु के गुणों को मानो। गुणों को जीवन में धारण करोगे। तभी वास्तविक कल्याण होगा। उन्होंने कहा, गुरु समाज को जोड़ते हैं। गुरु संयम और नियम की शक्ति के प्रतीक हैं। गुरु के प्रति निर्मल भाव रखना ही सच्ची गुरु भक्ति है। आचार्य ने कहा, साधु के दर्शन भी पुण्य से मिलते हैं। गुरु कभी किसी का अहित नहीं चाहते। वे चाहते हैं कि सभी स्वस्थ रहें।
आचार्य ने कहा, किशनगढ़ पत्थरों की नगरी ही नहीं है। यह भगवान की प्रतिमाओं को आकार देने वाली पावन भूमि है। मैं किशनगढ़ की इस पवित्र भूमि को आध्यात्मिक ऊर्जा और सूर्य मंत्र देने आया हूं। उन्होंने कहा, पंचम काल – प्रतिकूलताओं का काल है। फिर भी जो इस काल में संयम और दीक्षा का मार्ग अपनाते हैं, वे धन्य हैं। आचार्यश्री ने कहा, जब – शिष्य के हृदय के तार गुरु के हृदय से जुड़ जाते हैं। तभी सच्ची गुरु भक्ति होती है। – माता-पिता और गुरु जीवन के सबसे बड़े तीर्थ हैं। साधु चलता-फिरता तीर्थ होता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

