तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ निर्वाण दिवस तीर्थ रक्षा दिवस के रूप में मनाया गया
आगरा, 20 जुलाई।
तीर्थंकर भगवान श्री नेमिनाथ निर्वाण दिवस के पावन अवसर पर आगरा जैन समाज ने इसे “तीर्थ रक्षा दिवस” के रूप में श्रद्धा, भक्ति एवं जागरूकता के साथ मनाया। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति तथा पूज्य आचार्य श्री 108 सौभाग्यसागर जी महाराज, आचार्य श्री 108 सुरत्नसागर जी महाराज एवं पूज्य मुनि श्री 108 समत्वसागर जी महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में, आगरा दिगम्बर जैन परिषद के तत्वावधान में श्री नेमीनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, नसीया जी पीरकल्यानी, आगरा में भगवान नेमिनाथ का भव्य निर्वाण लाडू अर्पित किया गया।
इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य मुनि श्री समत्वसागर जी महाराज ने तीर्थों एवं मंदिरों की सुरक्षा और संरक्षण के विषय में अत्यंत महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि “आज के मंदिर ही कल का इतिहास हैं और यही भविष्य के तीर्थ बनेंगे।” अतः प्रत्येक समाज को अपने मंदिरों एवं तीर्थों के कानूनी दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए तथा उन्हें सरकारी अभिलेखों में विधिवत पंजीकृत अवश्य कराना चाहिए।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि सूचना के अधिकार (RTI) के अंतर्गत जब भारत में जैन मंदिरों की संख्या की जानकारी मांगी गई, तब सरकारी अभिलेखों में अपेक्षा से बहुत कम मंदिर दर्ज पाए गए। यह स्थिति समाज के लिए चिंतन का विषय है।
मुनिश्री ने मंदिरों के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण के संबंध में भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि मंदिरों, शिखरों, मुख्य द्वारों एवं अन्य स्थलों पर केवल सजावटी आकृतियों के स्थान पर दिगम्बर प्रतिमाओं एवं जैन प्रतीकों को उकेरा जाना चाहिए। मंदिर की चारदीवारी पर स्पष्ट रूप से “दिगम्बर जैन मंदिर” अंकित कराया जाए तथा परिसर में विभिन्न स्थानों पर ताम्रपत्र एवं स्थायी शिलालेख स्थापित किए जाएं, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए यह प्रमाण बने रहें और कालांतर में भी दिगम्बर परंपरा की गाथा स्वयं बोलते रहें।
उन्होंने यह भी प्रेरणा दी कि प्राचीन परंपरा के अनुरूप जैन शास्त्रों को पुनः ताड़पत्र अथवा अन्य दीर्घजीवी माध्यमों पर अंकित कर संरक्षित करने का प्रयास किया जाए। साथ ही प्रत्येक नगर के प्रमुख मंदिर अथवा तीर्थ क्षेत्र में एक विशाल शिला पर उस नगर के जैन समाज का कम से कम पिछले 100 वर्षों का इतिहास उत्कीर्ण कराया जाए, जिससे समाज की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत सुरक्षित रह सके।
पूज्य आचार्य सौभाग्यसागर जी एवं सुरत्नसागर जी ने धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं से तीर्थों, मंदिरों एवं जैन विरासत के संरक्षण के लिए संकल्प व्यक्त करने का आव्हान कीया तथा भगवान नेमिनाथ के निर्वाण दिवस पर तीर्थ रक्षा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। इस अवसर पर भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय पदाधिकारीगण भी मौजूद रहे!
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312





