ताजमहल देखने आया दक्षिण अफ्रीका का पर्यटक, ‘गूगल मुनि’ समत्व सागर महाराज से अंग्रेज़ी में हुई धर्म चर्चा
विदेशी अतिथि ने लिया आशीर्वाद, अहिंसा, शांति और जैन दर्शन के संदेश से हुआ अभिभूत
आगरा।
ताजमहल की विश्वविख्यात सुंदरता देखने आए दक्षिण अफ्रीका के एक पर्यटक के लिए आगरा की यात्रा उस समय अविस्मरणीय बन गई, जब उन्होंने ‘गूगल मुनि’ के नाम से प्रसिद्ध जैन संत मुनिश्री 108 समत्व सागर महाराज के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। दिगंबर जैन नसिया, आगरा में विराजमान मुनिश्री से विदेशी अतिथि ने अंग्रेज़ी में जैन धर्म, अहिंसा, शांति और आध्यात्म पर विस्तृत चर्चा की।
वर्षायोग 2026 के लिए आगरा में विराजमान मुनिश्री समत्व सागर महाराज के दर्शन हेतु प्रतिदिन देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सोमवार को दक्षिण अफ्रीका से आए पर्यटक ने ताजमहल भ्रमण के बाद नसिया जी पहुंचकर गुरुदेव के सान्निध्य में समय बिताया। अंग्रेज़ी में हुई सहज एवं गहन धार्मिक चर्चा ने विदेशी अतिथि को अत्यंत प्रभावित किया।
मुनिश्री ने भगवान महावीर के अहिंसा, जीवदया, करुणा और विश्वशांति के संदेश को सरल भाषा में समझाया। यह संवाद इस बात का सजीव प्रमाण बना कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और जैन दर्शन आज विश्वभर के लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। विदेशी अतिथि ने भी अत्यंत विनम्र भाव से जैन धर्म के प्रति अपनी जिज्ञासा और श्रद्धा व्यक्त की।

दक्षिण अफ्रीका, जो अपनी वन्यजीव सफारी और स्वर्ण खानों के लिए प्रसिद्ध है, वहां से आए इस अतिथि ने ताजमहल की भव्यता तो देखी ही, साथ ही आध्यात्मिक ज्ञान का ऐसा अमूल्य खजाना भी प्राप्त किया, जिसने उनकी यात्रा को और अधिक सार्थक बना दिया।
यूँ ही नहीं कहलाते हैं ‘गूगल मुनि’
मुनिश्री 108 समत्व सागर महाराज आधुनिक युवा पीढ़ी के बीच ‘गूगल मुनि’ के नाम से लोकप्रिय हैं। लगभग 25 वर्ष पूर्व वे विद्यार्थी के रूप में कोटा आए थे। उन्होंने मध्यप्रदेश के विदिशा से बी.टेक. तथा बिट्स पिलानी, राजस्थान से एम.टेक. की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में आकर्षक करियर होने के बावजूद करोड़ों के पैकेज का त्याग कर उन्होंने संयम और आध्यात्म का मार्ग अपनाया।
आज उनके प्रवचन गूगल, यूट्यूब और सोशल मीडिया के माध्यम से देश-विदेश के लाखों लोगों तक पहुंच रहे हैं। विशेष रूप से युवा वर्ग उनके प्रेरक संदेशों से जीवन की नई दिशा प्राप्त कर रहा है।
विद्यार्थियों को देते हैं जीवन जीने की सीख
मुनिश्री समत्व सागर महाराज विद्यार्थियों को निराशा से दूर रहकर धैर्य, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उनका कहना है—
“भविष्य बहुत लंबा है। किसी एक परीक्षा या असफलता से जीवन समाप्त नहीं होता। अपनी योग्यता के अनुसार लक्ष्य चुनिए और पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़िए।”
वे माता-पिता से भी बच्चों पर अनावश्यक दबाव न बनाने का आग्रह करते हैं तथा मोबाइल की लत को आधुनिक समय की गंभीर समस्या बताते हैं। उनका सुझाव है कि रात 10 बजे के बाद इंटरनेट बंद कर देना चाहिए तथा सप्ताह में एक दिन “मोबाइल अवकाश” अवश्य रखना चाहिए।
एआई पर नहीं, अपनी प्रतिभा पर भरोसा रखें
मुनिश्री का मानना है कि विद्यार्थी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर पूरी तरह निर्भर न हों। वे कहते हैं कि एआई का अत्यधिक उपयोग रचनात्मकता को प्रभावित कर सकता है। विद्यार्थियों को अपनी मौलिक सोच, अध्ययन और वास्तविक प्रतिभा को विकसित करना चाहिए।
विदेशी पर्यटक और मुनिश्री समत्व सागर महाराज के बीच हुई यह आत्मीय धार्मिक चर्चा इस बात का प्रेरक उदाहरण बन गई कि जैन धर्म का अहिंसा और विश्वशांति का संदेश सीमाओं से परे जाकर पूरी मानवता को जोड़ने की शक्ति रखता है।
संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312



