राजस्थान की बेटियों यारिनी-याशिका ने बेंगलुरु में रचा इतिहास, भरतनाट्यम प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल कर बढ़ाया जैन समाज का गौरव
कनाडा से आई शिक्षिकाओं ने मंच पर किया सम्मानित, नैनवा (बूंदी) की प्रतिभाशाली बेटियों ने कला और संस्कारों से जीता सभी का दिल
बेंगलुरु साउथ | 18 जुलाई 2026
राजस्थान के बूंदी जिले के नैनवा कस्बे की प्रतिभाशाली बेटियों यारिनी और याशिका ने बेंगलुरु में आयोजित प्रतिष्ठित भरतनाटिका नृत्य प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर राजस्थान के साथ-साथ जैन समाज का भी गौरव बढ़ाया है। दोनों बालिकाओं की उत्कृष्ट प्रस्तुति ने दर्शकों और निर्णायकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कोरमंगला क्लब, बेंगलुरु में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्री गणेश की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। प्रतियोगिता में 36 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें यारिनी और याशिका ने अपनी मनमोहक एवं भावपूर्ण प्रस्तुति से प्रथम स्थान हासिल किया।
कार्यक्रम के दौरान कनाडा से आई दो शिक्षिकाओं ने दोनों बालिकाओं की प्रतिभा और प्रस्तुति की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए मंच पर प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस उपलब्धि से दक्षिण भारत में राजस्थान, बूंदी जिले के नैनवा और जैन समाज का नाम गौरव के साथ स्थापित हुआ।
यारिनी और याशिका की माता ज्योति जैन, जो जैन गजट के जिला बूंदी (नैनवा) संवाददाता महावीर जैन सरावगी की पुत्री हैं, ने बचपन से ही अपनी बेटियों को जैन धर्म एवं भारतीय संस्कृति के संस्कार दिए। दोनों बालिकाएं णमोकार महामंत्र, भक्तामर स्तोत्र सहित जैन धर्म के सिद्धांतों का नियमित अध्ययन और अभ्यास करती हैं तथा भगवान महावीर के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात कर रही हैं।
दोनों बालिकाएं इससे पूर्व भी नृत्य, खेलकूद, फुटबॉल, बैडमिंटन एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अनेक सम्मान प्राप्त कर चुकी हैं।
बालिकाओं के पिता डॉ. राम चंदन बेंगलुरु के प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ (ऑर्थोपेडिक सर्जन) हैं, जिन्होंने अपनी चिकित्सा सेवाओं और सफल सर्जरी के माध्यम से विशेष पहचान बनाई है।
ज्योति जैन ने राजस्थान से मिले धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्कारों को बेंगलुरु में भी जीवंत बनाए रखा है। वे सामाजिक, धार्मिक गतिविधियों और संत सेवा में सक्रिय रहते हुए अपनी अलग पहचान स्थापित कर चुकी हैं। उनकी बेटियों की यह सफलता इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि माता-पिता द्वारा दिए गए संस्कार बच्चों के व्यक्तित्व को जीवनभर दिशा देते हैं। चाहे वे देश में रहें या विदेश में, अपने धर्म, संस्कृति और मूल्यों से जुड़े रहते हैं।
— अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312


