त्याग और तप की पावन धरती हाटपिपलिया में गूंजेगा धर्म का जयघोष, गुरुवार को मुनि श्री 108 विमलसागर महाराज संघ का होगा भव्य मंगल प्रवेश
नगर सीमा से जैन मंदिर तक निकलेगी भव्य अगवानी यात्रा, पदप्रक्षालन, चरण वंदन, मंगल प्रवचन एवं आहारचर्या के साथ श्रद्धा का अनुपम संगम
हाटपिपलिया।
अनेक संतों, त्यागियों और तपस्वियों की जन्मभूमि एवं कर्मभूमि हाटपिपलिया गुरुवार को एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक क्षण की साक्षी बनेगी। परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के परम शिष्य एवं आचार्य श्री 108 समयसागर महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री 108 विमलसागर महाराज ससंघ का नगर में भव्य मंगल प्रवेश होगा। गुरुदेव के आगमन को लेकर पूरे नगर में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का वातावरण है।
रुचि टोंग्या ने बताया कि प्रातःकाल नगर सीमा पर श्रद्धालु गुरुदेव की अगवानी करेंगे। इसके पश्चात भव्य शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई जैन मंदिर पहुंचेगी। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालु पदप्रक्षालन, चरण वंदना एवं पुष्पवर्षा कर गुरुदेव का भावपूर्ण स्वागत करेंगे।
जैन मंदिर में गुरुदेव के मंगल प्रवचन एवं आहारचर्या का आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि मुनि श्री विमलसागर महाराज ससंघ पिछले कई दिनों से मालवा क्षेत्र एवं इंदौर में धर्म प्रभावना कर रहे हैं। बुधवार प्रातः उनका मंगल प्रवेश पारसनाथ अतिशय क्षेत्र, डबल चौकी में हुआ। अब गुरुवार को उनका हाटपिपलिया आगमन होगा।
नगर के श्रद्धालु गुरुदेव के श्रीचरणों में वर्षायोग-2026 हाटपिपलिया में संपन्न कराने का भावपूर्ण निवेदन भी करेंगे।
मुनि श्री विमलसागर महाराज : एक संक्षिप्त परिचय
मुनि श्री विमलसागर महाराज का मालवा क्षेत्र से विशेष आध्यात्मिक संबंध रहा है। उन्हें 22 अप्रैल 1999 को सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र, नेमावर में आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के करकमलों से मुनि दीक्षा प्राप्त हुई थी। इससे पूर्व मात्र 23 वर्ष की आयु में 28 अप्रैल 1998 को भाग्योदय तीर्थ में उन्होंने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण कर वैराग्य और तपस्या का पथ अपनाया।
रिपोर्ट : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी
मो.: 9929747312

