शुद्ध शाकाहार से सुरक्षित रहेगा धर्म और स्वास्थ्य, मुनि प्रमाण सागर महाराज ने छात्रों-युवाओं को दिया बड़ा संदेश”

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“शुद्ध शाकाहार से सुरक्षित रहेगा धर्म और स्वास्थ्य, मुनि प्रमाण सागर महाराज ने छात्रों-युवाओं को दिया बड़ा संदेश”

 

अभिभावकों, विद्यार्थियों, समाज और युवाओं से चार सूत्रों पर काम करने का आह्वान; शिक्षण संस्थानों में अलग शाकाहारी भोजन व्यवस्था की उठाई मांग

मधुबन।

राष्ट्रसंत मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज ने शुद्ध एवं अहिंसक खान-पान को नई पीढ़ी के संस्कार, स्वास्थ्य और धर्म की सुरक्षा का आधार बताते हुए विद्यार्थियों, अभिभावकों और समाज से सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि चार स्तरों—अभिभावक, विद्यार्थी, समाज और स्वयं युवाओं—की सकारात्मक भागीदारी सुनिश्चित हो जाए, तो देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में शुद्ध शाकाहारी भोजन की व्यवस्था संभव है।

मुनि श्री ने कहा कि अभिभावकों का पहला कर्तव्य केवल बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें श्रेष्ठ संस्कार देना भी है। शिक्षा तभी सार्थक है, जब उसके साथ धार्मिक और नैतिक संस्कार सुरक्षित रहें। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों का प्रवेश ऐसे शिक्षण संस्थानों में कराएं, जहाँ उनकी धार्मिक भावनाओं और शुद्ध शाकाहारी जीवनशैली का सम्मान हो।

उन्होंने बताया कि देश के कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों और अभिभावकों के संयुक्त प्रयासों से अलग शाकाहारी भोजनालय सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं। मुनि श्री ने विद्यार्थियों से भी संगठित होकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और शुद्ध शाकाहारी भोजन की व्यवस्था के लिए सकारात्मक पहल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि इस विषय को केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और पोषण विज्ञान से भी जोड़ा जाए, तो इसका प्रभाव समाज में और अधिक व्यापक होगा।

मुनि श्री ने समाज की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अहिंसक जीवनशैली के समर्थन में व्यापक जन-जागरण अभियान चलाया जाना चाहिए। सोशल मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों से सरकार और शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन तक यह मांग पहुँचाई जाए कि शुद्ध शाकाहारी विद्यार्थियों के लिए पृथक भोजन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि कभी उचित भोजन उपलब्ध न हो, तो उसे तपस्या का अवसर मानें। ऐसे अनेक विद्यार्थियों के उदाहरण हैं जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने धार्मिक सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और आत्मसंयम के बल पर अपनी साधना को बनाए रखा।

मुनि श्री ने अभिभावकों को भी आत्मचिंतन का संदेश देते हुए कहा कि यदि वे चाहते हैं कि उनके बच्चे अपने धार्मिक सिद्धांतों पर अडिग रहें, तो उन्हें स्वयं भी ऐसे होटल और रेस्तरां में भोजन करने से बचना चाहिए, जहाँ शाकाहारी और मांसाहारी भोजन एक साथ तैयार और परोसा जाता है। उन्होंने कहा कि बच्चों में संस्कार उपदेश से नहीं, बल्कि परिवार के आचरण से विकसित होते हैं।

अपने उद्बोधन के अंत में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने युवाओं से शुद्ध शाकाहार और अहिंसक जीवनशैली के समर्थन में राष्ट्रव्यापी जन-जागरण अभियान चलाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि अभिभावक, विद्यार्थी, समाज और युवा वर्ग इन चार सूत्रों को अपनाएँ, तो देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में शुद्ध शाकाहारी भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जा सकती है। उन्होंने बताया कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर सहित अनेक संस्थानों में इस दिशा में सफल प्रयास हो चुके हैं।

राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि मुनि श्री का यह संदेश केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि पूरे छात्र समुदाय, अभिभावकों और समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि यदि सभी मिलकर शुद्ध, सात्विक और अहिंसक खान-पान के संरक्षण का संकल्प लें, तो नई पीढ़ी के संस्कारों और स्वास्थ्य दोनों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि इंदौर, भोपाल और जबलपुर में मुनि श्री की प्रेरणा से समाज ने इस दिशा में महत्वपूर्ण और सकारात्मक निर्णय लिए हैं।

      संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

 

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