गुजरात के अतिशय क्षेत्र देवपुरी देरोल में पुण्यार्जक परिवारों ने किया 52 जिनालय का भव्य शिलान्यास

धर्म

गुजरात के अतिशय क्षेत्र देवपुरी देरोल में पुण्यार्जक परिवारों ने किया 52 जिनालय का भव्य शिलान्यास
देवपुरी अहमदाबाद

श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र देवपुरी देरोल अहमदाबाद गुजरात में पंचम पट्टाघीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के मंगल आशीर्वाद से उनके संघस्थ र्शिष्य मुनि श्री चिंतन सागर जी मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी एवं क्षुल्लक श्री विशाल सागर जी मुनि संघ के सानिध्य में अतिशय क्षेत्र देवपुरी देरोल अहमदाबाद में दिनांक 15 दिसंबर 2024 को 52 जिनालय के निर्माण हेतु भव्य शिलान्यास कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। विशा हूमड़ जैन देवपुरी देरोल पंच महाजन के ट्रस्टी सुनील मेहता नयन ईडर ने बताया कि मुख्य शिलान्यास राजेश बी अहमदाबाद मुंबई द्वारा किया गया ,अन्य आयुध शिला सुभाष भाई ,अभय कुमार जैन, नम्रता विनय कुमार जैन, वीर बाला जयंती भाई शाह हंसमुख भाई , श्रीमती रीता चंदू भाई काला ,श्रीमती सुलोचना वी जैन तथा विनय छबील दास जी दोषी परिवार द्वारा संहितासुरी प्रतिष्ठाचार्य श्री हंसमुख शास्त्री धरियावद ,वास्तु शास्त्री संपत जी सेठी मुंबई कोलकाता के निर्देशन ओर मंत्रोच्चार से 15 दिसंबर को पंडित कीर्तिश, पंडित विशाल के सहयोग से रखी गईं। ट्रस्ट के पदाधिकारी ने बताया कि 15 दिसंबर को प्रातः श्रीजी के अभिषेक पश्चात,घटयात्रा निकाली गई, मंगल घट के जल से विघि पूर्वक भूमि शुद्धि कर शिलाओं का पूजन और हवन राजेश बी शाह और सौभाग्यशाली परिवारों द्वारा की गई। बाहर से पधारे अतिथियों और कमेटी द्वारा चित्र अनावरण कर दीप प्रज्वलन किया गया मंगलाचरण के पश्चात धर्म सभा में बाहर से पधारे अतिथियो , विद्वानो आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के उपसंघ का बिहार कराने में सहयोगियों का सम्मान किया गया । पंडित हंसमुख शास्त्री ने बताया कि मंदिर जैन आगम परंपरा और संस्कृति की धरोहर है जो हमारे लिए गौरव का विषय है। मुनिश्री चिंतन सागर जी ने अपने आशीर्वचन में बताया कि मंदिर आत्मविशुद्धि ,आत्मा की शांति ,संयम तप,साधना का साधन माध्यम है। जैन धर्म में जिन धर्म, जिन आगम ,जिन चैत्यालय का विशेष महत्व है इससे धर्म की प्रभावना होती है ।
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने पारसोला में बताया था कि संपूर्ण विश्व में 170 कर्मभूमियों में तीन लोक होते हैं जिसमें 8 करोड़ 75 लाख से अधिक जिनालय हैं प्रत्येक जिलालय में 108 प्रतिमा होती है इस अनुसार 925 करोड़ से अधिक जिन प्रतिमाएं संपूर्ण विश्व में है।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 55 वर्षों पूर्व दीक्षा उपरांत नेत्र ज्योति चली गई थी जो प्रभु की भक्ति करने से वापस प्राप्त हुई। अभी बिहार करते हुए क्षुल्लक श्री विशाल सागर जी का भी स्वास्थ्य खराब हो गया था जो प्रभु की भक्ति से ठीक हुआ और समय पर संघ का पदार्पण हुआ प्रभु की भक्ति और गुरु के आशीर्वाद में में बहुत शक्ति होती है ।मुनिश्री संघ के आशीर्वचन के पश्चात मंदिर का शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित हुआ। राजेश पंचोलिया इंदौर अनुसार कार्यक्रम में अनेक नगरों पारसोला से जयंतीलाल कोठारी ,ऋषभ पचौरी, रमेश बगेरिया ,नरेश घाटलिया ,अंकित, प्रकाश बगेरिया, विवेक, महावीर, महेंद्र,विनय, व्रती हुक्मीचंद जी सलूंबर सहित सैकड़ों भक्त उपस्थित रहे।
पारसोला ,सलूंबर धरियावद, उदयपुर , बांसवाड़ा जयपुर,साबला ,अहमदाबाद हिम्मतनगर ,ईडर, ढाकला सहित अनेक नगरों से सैकड़ो श्रद्धालुओं ने धर्म लाभ लिया।
इस अवसर पर प्रतिष्ठाचार्य हंसमुख जी शास्त्री ,वास्तुविद संपतलाल तथा अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन सुनील मेहता द्वारा किया गया। इसके पूर्व विगत माह में मंदिर प्रबंधन कमेटी के सदस्यों ने राजेश बी शाह, सुनील मेहता,नमन भैया ईडर सहित पारसोला जाकर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज से संघ सहित पधारने का और आशीर्वाद देने हेतु निवेदन किया था जिसके कारण आचार्य संघ के तीन साधुओं को देवपुरी देरोल कार्यक्रम हेतु आचार्य श्री ने सहज स्वीकृति दी।

राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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