राग-द्वेष के त्याग से ही जीवन में चमक : मुनिश्री योगसागर महाराज बूंदी
संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के धर्म प्रभावक शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108योगसागरजी महाराज ने कहा कि शास्त्रों का स्वाध्याय सही विधि और क्रम से करने पर ही मनुष्य को पुण्य का वास्तविक लाभ मिलता है। राग, द्वेष, क्रोध, मोह और माया जैसे विकारों का त्याग करने से ही जीवन में वास्तविक चमक आती है।
वे रविवार को देवपुरा स्थित संभवनाथ दिगंबर जैन मंदिर में नियमित प्रवचन श्रृंखला के तहत धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति शास्त्रों का स्वाध्याय तो करता है, लेकिन सही तरीका नहीं जानने के कारण उसे उसका पूर्ण पुण्य , लाभ नहीं मिल पाता। मुनिश्री ने कहा , कि यदि शास्त्रों का अध्ययन क्रमबद्ध न तरीके से किया जाए तो मनुष्य के ः भीतर वैराग्य का भाव विकसित होता है और राग-द्वेष, क्रोध, मोह, माया जैसे ई कर्मों का नाश होने लगता है। इससे ■ा आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। ने उन्होंने गंदे कपड़ों का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कपड़ों को पहले साबुन में गलाया जाता है और बाद में प्रेस करने पर उनमें चमक आती है, उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में भी राग-द्वेष, क्रोध, मोह, मान और माया जैसी गंदगी दूर होने पर ही वास्तविक चमक आती है।
बच्चों को बचपन से ही धर्म, संयम, विनम्रता के संस्कार दिए जाए
मुनिश्री ने संस्कारों पर प्रवचन देते हुए कहा कि मनुष्य का वास्तविक आभूषण उसके संस्कार होते हैं। धन, पद और प्रतिष्ठा क्षणिक हो सकते हैं, लेकिन अच्छे संस्कार जीवनभर व्यक्ति को सम्मान दिलाते हैं। उन्होंने कहा कि परिवार में बच्चों को बचपन से ही धर्म, संयम, विनम्रता और सेवा के संस्कार दिए जाएं तो वही बच्चे आगे चलकर समाज और राष्ट्र की शक्ति बनते हैं। उन्होंने कहा कि आजआधुनिकता की दौड़ में लोग संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। इसका असर परिवार और समाज दोनों पर दिखाई दे
रहा है।



यदि घरों में बड़ों का सम्मान, सत्य बोलने की आदत और धर्म के प्रति आस्था का वातावरण बने तो आने वाली पीढ़ी संस्कारित बनेगी। मुनिश्री ने कहा कि संस्कार ही मनुष्य को सही और गलत का अंतर समझाते हैं और जीवन को सही दिशा देते हैं।
धर्मसभा को क्षुल्लक श्रीसंयमसागरजी महाराज ने संबोधित किया। उन्होंने भगवान की पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पूजा के बिना पुण्य का लाभ प्राप्त नहीं होता। धर्मसभा से पूर्व आचार्य विद्यासागर महाराज की अष्ट द्रव्यों से पूजा पं. देवेंद्र जैन और संगीतकार आयुष जैन ने करवाई।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
