‘देखो, जानो और जाने दो’—जीवन को सुखी बनाने का सबसे सरल मंत्र: अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
देवली।
“सुख-दुःख, स्वर्ग-नरक की बातें बाद में… पहले यह जानो कि जीना कैसे है।” इसी जीवनोपयोगी संदेश के साथ अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में श्रद्धालुओं को जीवन में शांति, संतुलन और साक्षी भाव अपनाने का संदेश दिया।
आचार्य श्री ने कहा कि आज का व्यक्ति अपने जीवन से अधिक दूसरों की बातों और बाहरी घटनाओं से प्रभावित होकर स्वयं ही दुःख और चिंताओं का बोझ उठा लेता है। कोई कुछ कह दे तो वह आहत हो जाता है, कहीं कोई घटना घट जाए तो उसमें उलझ जाता है, बाजार ऊपर-नीचे हो जाए तो चिंतित हो जाता है। व्यक्ति हर घटना को अपने जीवन से जोड़ लेता है, जबकि उसका उससे कोई वास्तविक संबंध नहीं होता।
उन्होंने कहा कि यही कारण है कि आज मनुष्य अपने मन की शांति और चेहरे की मुस्कान खोता जा रहा है। यदि कोई क्रोधित हो जाए तो वह भी क्रोध में भर जाता है। रिश्तों में अपेक्षाएँ बढ़ने पर अहंकार जन्म ले लेता है और व्यक्ति हर क्रिया की प्रतिक्रिया में उलझकर स्वयं को अशांत बना लेता है।
गुरु-शिष्य की प्रेरक कथा से समझाया जीवन का रहस्य
प्रवचन के दौरान आचार्य श्री ने एक प्रेरक कथा सुनाई। एक शिष्य अपने गुरु के पास पहुँचा और बोला, “लोग मुझे गुस्सा दिलाते हैं, मैं क्या करूँ?”
गुरु उसे नदी किनारे ले गए। वहाँ पानी में बहते सूखे पत्तों और एक पत्थर की ओर संकेत करते हुए बोले, “देखो, पत्ते हल्के हैं इसलिए पानी के साथ बह रहे हैं, जबकि पत्थर भारी होने के कारण डूब गया।”
गुरु ने समझाया, “यदि तुम हर बात को अपने भीतर पकड़कर बैठ जाओगे तो पत्थर की तरह भारी हो जाओगे और दुःखों के सागर में डूब जाओगे। लेकिन यदि पत्ते की तरह हल्के रहोगे तो जीवन सहज और आनंदमय बन जाएगा।”
‘साक्षी भाव’ ही जीवन की सच्ची साधना
आचार्य श्री ने कहा कि साक्षी भाव का वास्तविक अर्थ है—”देखो, जानो और जाने दो।” किसी भी बाहरी वस्तु, घटना या व्यक्ति में अनावश्यक रूप से उलझना नहीं चाहिए। संसार में घटनाएँ होती रहेंगी, लोग आएँगे-जाएँगे, कोई सम्मान देगा तो कोई अपमान भी करेगा, लेकिन जो व्यक्ति भीतर से शांत रहता है वही जीवन का वास्तविक आनंद प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि जिस दिन मनुष्य इस सूत्र को अपने जीवन में आत्मसात कर लेगा, उसी दिन से उसका जीवन बदल जाएगा और उसका घर-परिवार भी स्वर्ग समान बन जाएगा।
आचार्य श्री के आगामी कार्यक्रम
6 जुलाई 2026 (प्रातः): सोनकच्छ (जिला देवास) में भव्य मंगल प्रवेश।
7 जुलाई 2026: “हर माह एक उपवास” जनजागरण अभियान का विशेष कार्यक्रम।
9 जुलाई 2026 (दोपहर): पुष्पगिरी में भव्य मंगल प्रवेश।
जानकारी स्रोत: प्रचार-प्रसार संयोजक रोमिल पाटणी (सोनकच्छ), नरेंद्र अजमेरा, पीयूष कासलीवाल (औरंगाबाद)।

संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312
