वात्सल्य वारिधि 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने और मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ओर दो माताजी ने केश लोचन किया ।
मंढा सुरेरा जिला सीकर

प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी की मूल बालब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 36 साधुओं सहित (37 पिच्छी) का दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी महाराज की समाधि स्थली सीकर के दर्शन ,वंदना हेतु मंगल विहार चल रहा है आज रविवार को अनेक श्रद्धालुओं के सामने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, मुनि श्री हितेंद्र सागर जी आर्यिका श्री दर्शना मति ,आर्यिका श्री निर्मोह मति आषाढ़ मास कृष्ण पक्ष पंचमी 5 जुलाई 2026 को मंढा सुरेरा जिला सीकर में प्रवास के दौरान केशलोचन किया ।केशलोचन के बारे में संघ की आर्यिका श्री महायशमति जी ने चर्चा में बताया कि प्रत्येक दिगंबर साधु को 2 माह से 4 माह की अवधि के भीतर के केशलोचन करना अनिवार्य है केशलोच दिगंबर साधु का मूल गुण है । केशलोचन के माध्यम से शरीर से राग और मोह दूर होता है केश लोचन की प्रक्रिया में आर्यिका श्री ने बताया कि केश्लोचन करते समय केवल राख का उपयोग किया जाता , जैन धर्म अहिंसा प्रधान धर्म है बालों का लोचन अगर नहीं किए जाएं तो उसमें छोटे-छोटे जीवो की उत्पत्ति होने की संभावना होती है जैन साधु अहिंसा धर्म के महाव्रती होते हैं। बाल हाथों से इसलिए उखाड़े जाते हैं कि बालों को कटिंग करने के लिए सेविंग कराने के लिए अन्य द्रव्य की आवश्यकता होती है डा राजेश पंचोलिया हितेश रारा के अनुसार माताजी ने बताया कि जैन साधु अपरिग्रही होते हैं। इसलिए जैन साधु अपने हाथ से केशलोचन करते हैं बाल सौंदर्य का प्रतीक हैं इससे राग और आकर्षण होता है। केश लोच से शरीर से ममत्व दूर होता है केश लोचन के समय तप,संयम, धैर्य के साथ धर्म की प्रभावना होती है जिस दिन जैन साधु केशलोच करते हैं उस दिन उपवास करते हैं ।केश लोचन देखकर अनुमोदना करने से पुण्य की प्राप्ति होती है कर्मों की निर्जरा होती है। इस अवसर पर अनेक समाज जन उपस्थित रहे। अनेक महिलाओ ने वैराग्य पूर्ण भजन गा कर केशलोचन की तपस्या की अनुमोदना की।
डा राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
