“जहां संतों के चरण पड़ते हैं, वहां कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है” : मुनिश्री सुधासागर महाराज
पुण्योदय तीर्थ बजरंगगढ़ में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ का भव्य समापन, लोककल्याण का दिया संदेश
गुना।
पुण्योदय तीर्थ, बजरंगगढ़ में आयोजित श्री 1008 जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ का आध्यात्मिक उल्लास और श्रद्धा के वातावरण में भव्य समापन हुआ। निर्यापक श्रमण मुनिश्री सुधासागर महाराज के सान्निध्य में संपन्न हुए इस महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ प्राप्त किया। भगवान के विराजमान होने के पश्चात मुनिश्री ससंघ ने मंगल विहार करते हुए रुठियाई के लिए प्रस्थान किया।
समापन अवसर पर आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर महाराज ने कहा कि संत कभी केवल अपने लिए नहीं जीते, उनका प्रत्येक श्वास समस्त जीवों के कल्याण और विश्व के मंगल के लिए समर्पित होता है। तीनों समय की सामायिक में संत यही प्रार्थना करते हैं कि संसार का प्रत्येक प्राणी सुखी रहे, सभी का मंगल हो और विश्व में शांति स्थापित हो।
उन्होंने कहा कि संत का प्रत्येक क्षण आत्मचिंतन, स्वाध्याय, साधना और लोककल्याण की भावना में व्यतीत होता है। संत समाज के बीच रहकर भी संसार की नश्वरता का बोध कराते हैं तथा संयम, सदाचार और आध्यात्मिक जीवन का मार्ग दिखाकर मानव जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा देते हैं।
धर्मसभा के उपरांत पंचकल्याणक महोत्सव के प्रमुख पात्रों एवं आयोजन में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से सहयोग देने वाले श्रद्धालुओं का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समिति द्वारा उन्हें प्रशस्ति-पत्र, स्मृति-चिह्न एवं पीत वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर धर्म और संस्कृति के ऐसे आयोजनों को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प भी दोहराया गया।
शाम 4:45 बजे मुनिश्री सुधासागर महाराज ससंघ 18 पिच्छिकाओं के साथ लगभग एक माह के प्रवास के बाद मंगल विहार करते हुए रुठियाई के लिए रवाना हुए। रविवार सुबह उनके नगर प्रवेश पर श्रद्धालुओं द्वारा भव्य अगवानी की जाएगी।
इससे पूर्व रुठियाई, राधौगढ़, एनएफएल, बीनागंज, बांसवाड़ा एवं इंदौर की समितियों ने श्रीफल अर्पित कर मुनिश्री से अपने-अपने नगर में मंगल प्रवेश का विनम्र निवेदन किया।

— संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312
