रिश्तों की दीवार नहीं, दिलों की जमीन बढ़ाइए : पुलकसागर
सागवाड़ा।
नगर के ऋषभ वाटिका में सकल दिगंबर जैन समाज के संयोजन में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव के अंतर्गत गुरुवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय संत आचार्य पुलक सागरजी महाराज ने कहा कि रिश्तों की दीवारें मत तोड़ो, लकीरें मतखींचो, बल्कि रिश्तों की जमीन को बड़ा करने का प्रयास करो।
उन्होंने कहा कि पल में न जाने क्या घट जाए, इसलिए जीवन को प्रेम, अपनापन और भाईचारे के साथ जीना चाहिए। आचार्यश्री ने कहा कि बचपन में लोग लड़ने के बाद भी एक हो जाते हैं, लेकिन बड़े होकर एक-दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं। वर्तमान समय की विडंबना बताते हुए आचार्य ने कहा कि आज भाईचारा समाप्त होता जा रहा है। स्वार्थ में परिवार खून के रिश्तों को भूलता जा रहा है। अहंकार बढ़ गया है और समय के साथ पीढ़ियों की स्मृतियां मिटती जा रही हैं। लोग एक-दूसरे को गिराने में लगे हैं।


आचार्य श्री ने इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि सब कुछ होने के बावजूद रावण इसलिए हारा क्योंकि उसके पास लक्ष्मण जैसा भाई नहीं था। राम इसलिए जीते क्योंकि उनके साथ भाई लक्ष्मण खड़ा था। आजभी भाई-भाई को नहीं समझ रहा है, यही सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। आचार्य ने कहा कि धर्म में भाई का साथ और भाई से कभी विद्रोह मत करो। कुल की मर्यादा कभी मत भूलो। आचार्यश्री ने समाज को संदेश देते हुए कहा कि किसी भी समाज में विवाद नहीं होना चाहिए। मकान का बंटवारा हो सकता है, लेकिन दिलों के बीच दीवार कभी खड़ी मत करो।



दिलों में एकता बनी रहनी चाहिए। उन्होंने बाली सुग्रीव और भरत बाहुबली केउदाहरण देकर अहंकार और जमीन जागीर से उत्पन्न विवादों से दूर रहने की प्रेरणा दी इससे पूर्व महोत्सव के शुभारंभ पर अतिथियों ने दीप प्रज्वलन किया। अठारह हजार दशा हूमड़ समाज की महासचिव साधना कोठारी, समाज के ट्रस्टी रिनेश कोठारी, नीलेश संघवी, हुमड़ फेडरेशन के युवा वैभव इंग गोवाड़िया आदि ने आचार्य पुलक सागरजी महाराज का पाद प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्मचारी सुरेंद्र भैया एवं प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया ने किया। इस अवसर पर नगर सहित आसपास क्षेत्र के कई श्रद्धालु मौजूद रहे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
