*8वर्षों बाद धर्मतीर्थ प्रणेता आचार्य श्री गुप्तिनन्दी जी गुरुदेव ससंघ का नवग्रह तीर्थ प्रणेता आचार्य श्री गुणधरनंदी सहित गुरुभाईयों से वात्सल्य मिलन हुआ* *आचार्य श्री गुणधरनंदी जी ने कालजयी कृति का निर्माण किया-आचार्य गुप्तिनन्दी*
वरूर
राष्ट्र संत आचार्य श्री गुणधरनंदी जी की प्रेरणा से निर्मित405फुट के महाविशाल सुमेरू पर्वत के अंतर्राष्ट्रीय पँचकल्याणक एवं विश्व वंदनीय महाविशाल श्री पार्श्वनाथ आदि नवग्रह के आराध्य देव नव तीर्थंकरों के महामस्तकाभिषेक महोत्सव के निमंत्रण पर लगभग800किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए आचार्य श्री गुप्तिनन्दी जी गुरुदेव ससंघ का नवग्रह धर्मतीर्थ क्षेत्र से नवग्रह अतिशय क्षेत्र वरूर में मंगलप्रवेश हुआ।
आचार्य श्री के साथ मुनि श्री विमलगुप्तजी, गणिनी आर्यिकाश्री आस्थाश्री माताजी, क्षुल्लिका धन्यश्री माताजी, क्षुल्लिका तीर्थश्री माताजी, ब्र.कांचन दादी, दीक्षार्थी ब्र.निर्मल भैया सहित अनेकों पदयात्री पदविहार करते हुए 50दिनों से लगातार चल रहे थे।मंगलप्रवेश के दिन धर्मतीर्थ कमेटी के प्रमुख पदाधिकारी

भक्त भी वहाँ आये।इस अवसर आचार्य श्री की अगवानी करने के लिए आचार्य श्री पद्मनंदी जी ससंघ, आचार्य श्री गुणधरनंदी जी ससंघ, आचार्य श्री सुविधि सागरजी ससंघ, आचार्य श्री गुलाब भूषण जी, मुनि श्री पुण्यसागरजी , क्षुल्लक श्री ध्यान सागर जी,नवग्रह तीर्थ के भट्टारक श्री धर्मसेन पट्टाचार्य महास्वामी सहित अनेकों त्यागी व्रती, आये और सैकड़ों भक्तों ने जयघोष के सभी आचार्य श्री संघ का मंगलप्रवेश मिलन महोत्सव देखा।भट्टारक श्री धर्मसेन स्वामी जी व आर्यिकाश्री नूतनमती माताजी के नेतृत्व में सभी भक्तों ने सभी आचार्यों का दूध आदि विभिन्न द्रव्यों से पादप्रक्षालन किया।पुष्प वर्षा की गई।
मंचसंचालन स्वागत उद्बोधन भट्टारक श्री धर्मसेन स्वामी जी ने
किया।जिनवाणी पुत्र क्षुल्लक श्री ध्यान सागरजी ने मंगलाचरण किया। आगमस्वरा गणिनी आर्यिकाश्री आस्थाश्री माताजी ने गुरूदर्शन और वात्सल्य मिलन के अद्भुत आनंद का बखान किया।राष्ट्र संत आचार्य श्री गुणधरनंदी जी ने आगंतुक सभी आचार्यों का हार्दिक स्वागत किया।और बताया कि ये महोत्सव विश्व का अविस्मरणीय ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव होगा जिसमें महामहिम उपराष्ट्रपति, पाँच राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, आदि अनेकों गणमान्य एवं विश्व प्रसिद्ध कलाकार आ रहे हैं।इससे भी बढ़कर हमारे दीक्षा शिक्षा गुरुदेव, हमारे भाग्य विधाता, हमारे सर्वस्व जगद्गुरू गणाधिपति गणधराचार्य श्री कुन्थुसागरजी गुरुदेव ससंघ आ रहे हैं।उनके साथ हमारे अनेकों साधर्मी गुरुबंधुओ का आगमन यहाँ पर हो रहा है।

आचार्य श्री गुप्तिनन्दी जी ने कहा- यदि ये सुमेरू पर्वत इतना महाविशाल महामनोहर, चित्त को आकर्षित करने वाला लग रहा है तो साक्षात सुमेरू के दर्शन से कितना आनंद आयेगा।इसे दूर से देखकर ही हमारी पदयात्रा का आनंद अनंतगुणा बढ़ गया है।हमें हमारे गुरुभाई पर अभिमान है।उनके इस महाकार्य की जितनी अनुशंसा की जाये उतनी कम है। आचार्य श्री सुविधि सागर जी ने कहा- सुमेरू पर्वत पर अनंत तीर्थंकरों का
जन्माभिषेक हो चुका है और अनंत मुनिराजों ने यहाँ से निर्वाण प्राप्त किया है।उसकी ये प्रतिकृति हमें उसी के दर्शन का साक्षात पुण्य प्राप्त करा रही है।आचार्य श्री पद्मनंदी ने कहा- कि हमारे आचार्य श्री गुणधरनंदी जी ने अनेकों भव्य जीवों के लिए सम्यग्दर्शन और सम्यज्ञान को पाने का सर्वश्रेष्ठ जिनायतन तैयार कराया है।इससे हजारों लाखों जीव लाभ लेंगे।*
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
