मोहनखेड़ा तीर्थ पर दिखा धर्म समन्वय का अद्भुत दृश्य, आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी ससंघ का भव्य स्वागत*

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मोहनखेड़ा तीर्थ पर दिखा धर्म समन्वय का अद्भुत दृश्य, आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी ससंघ का भव्य स्वागत*

 

मोहनखेड़ा। 1 जुलाई।

आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज ससंघ का मोहनखेड़ा श्वेतांबर तीर्थ क्षेत्र पर भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर श्वेतांबर समाज ने अत्यंत श्रद्धा, विनय और उत्साह के साथ बैंड-बाजों के बीच आचार्य श्री का भव्य स्वागत किया। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के चरणों में वंदन कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

 

 

 

यह पावन मोहनखेड़ा श्वेतांबर तीर्थ क्षेत्र पूज्य आचार्य श्री राजेंद्रसूरिश्वर जी महाराज की तपोस्थली के रूप में देशभर में प्रसिद्ध है। ऐसे पवित्र तीर्थ पर दिगंबर एवं श्वेतांबर परंपराओं के संतों का यह मिलन धर्म समन्वय और पारस्परिक सम्मान का प्रेरणादायी उदाहरण बन गया।

 

 

 

इस अवसर पर श्वेतांबर परंपरा के पूज्य साधु हितेशचंद्रसूरिश्वर जी महाराज भी आचार्य श्री की अगवानी हेतु पधारे। दोनों संतों के मध्य आत्मीय एवं धार्मिक विषयों पर सारगर्भित चर्चा हुई। तत्पश्चात श्वेतांबर संघ द्वारा आचार्य श्री ससंघ को संपूर्ण तीर्थ क्षेत्र का दर्शन एवं भ्रमण कराया गया।

 

धर्मसभा में आचार्य श्री ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि मनुष्य को सदैव धर्म के कार्यों में तत्पर रहना चाहिए। जहां से, जिस प्रकार से और जिस माध्यम से धर्म का लाभ प्राप्त हो, उसे विनम्रता के साथ ग्रहण करना चाहिए। धर्म किसी संकीर्णता का नहीं, बल्कि आत्मकल्याण, सद्भाव, संयम, सेवा और सदाचार का मार्ग है। गुरुदेव ने कहा कि जीवन में सच्ची उन्नति धन या वैभव से नहीं, बल्कि उत्तम संस्कार, सद्विचार और धर्ममय आचरण से होती है। धर्म से जुड़ा प्रत्येक क्षण आत्मा के कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

 

 

इसके पश्चात आचार्य श्री ससंघ की आहारचर्या संपन्न हुई। इस अवसर पर श्वेतांबर साधुगणों ने भी दिगंबर मुनियों की कठोर एवं विलक्षण आहारचर्या का अवलोकन किया। उन्हें बताया कि दिगंबर साधु 24 घंटे में केवल एक बार खड़े होकर आहार एवं जल ग्रहण करते हैं तथा आजीवन किसी भी प्रकार के वाहन का उपयोग किए बिना हजारों किलोमीटर तक निरंतर पदविहार करते हैं। दिगंबर साधु जीवन के कठोर संयम, तप और त्याग की परंपरा से श्वेतांबर साधुओं को भी अवगत कराया गया।

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इस अवसर पर धार मध्यप्रदेश से पधारे श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के श्रीचरणों में मांतुंगगिरि पधारने हेतु श्रीफल भेंट कर विनम्र निवेदन किया। वहीं इंदौर की विभिन्न कॉलोनियों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरुदेव के दर्शन एवं वंदन के लिए मोहनखेड़ा पहुंचे। अनेक श्रद्धालु संघ के मंगल विहार में भी अपनी सेवाएं समर्पित करते हुए धर्मलाभ अर्जित कर रहे हैं।Smiling man with folded arms in a plaid shirt on the left; sunrise over mountains and a Hindi motivational quote on the right: 'जिनने धैर्य सीख लिया, उसने जीत का रास्ता पा लिया.'

 

 

 

आहारचर्या के उपरांत आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ससंघ का इंदौर की ओर मंगल विहार प्रारंभ हुआ। भीषण गर्मी के बावजूद गुरुदेव का संघ निरंतर पदविहार करते हुए चातुर्मास स्थली इंदौर की ओर अग्रसर है। प्रतिदिन कठिन तप, त्याग और संयममय साधना के साथ विहार करते हुए गुरुदेव का संघ असंख्य श्रद्धालुओं को धर्म, तप और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान कर रहा है।

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माही जैन धीरावत से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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