*दूसरों को झुकाने से पहले स्वयं झुकना सीखो :- गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी*
गुंसी
श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ गुंसी (राज.) में ससंघ विराजित गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी के मुखारविंद से अभिषेक शांतिधारा कराने का सौभाग्य ज्ञानचंद जैन भोपाल , प्रियांशी जैन जबलपुर ने प्राप्त किया । माताजी के उपवास के बाद पारणा कराने का अवसर पारस जैन चैनपुरा व संजू जैन निवाई ने प्राप्त किया ।
माताजी ने सभी को सम्बोधन देते हुए कहा कि – दूसरों को झुकाना चाहते हो, तो तुम स्वयं सुकना सीखो। कुछ पाना है, तो देना सीखो। जो झुक जाता है, वह उठ जाता है। गगन-सी ऊँचाईयाँ चाहिए, तो नम्रता सीखो।




मधुर भाषण, विनयशीलता उच्च- कुलीन मानवों की कुल-विद्या है। पाप मत करो, क्योंकि तुम पाप भूल सकते हो, परन्तु पाप का फल तुम्हे नहीं छोड़ेंगें। जैसे भाव करोगे, वैसा फल प्राप्त होगा। जैसे परिणाम करोगे, वैसी भविष्य की पर्याय प्राप्त होगी। पापों से बचो, पुण्य- कार्य करो। शांति से जियो, दुनिया को शांति से जीने दो । कर्तापन छोड़ो, समता पूर्वक जिंदगी जियो।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
