केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लिया मुनि पुंगव श्री सुधासागर महाराज का आशीर्वाद
सिंधिया की भावपूर्ण प्रार्थना— “अब शिवपुरी और ग्वालियर भी गुरुदेव के चरणों से पावन हों”
गुना।
“अपने भीतर ऐसी आत्मशक्ति जगाओ कि यदि पूरा संसार भी विरोध में खड़ा हो जाए, तब भी तुम्हारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सके।”
इन्हीं ओजस्वी शब्दों के साथ मुनि पुंगव आचार्य श्री सुधासागर महाराज ने विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए आत्मबल, सत्य और श्रद्धा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन का मूल मंत्र बाहरी संघर्ष नहीं, बल्कि स्वयं को इतना मजबूत बनाना है कि किसी भी विपरीत परिस्थिति का प्रभाव आपके जीवन पर न पड़े।
मुनिश्री ने कहा कि लोग अक्सर अपने विरोधियों को शांत कराने या उनके मुंह बंद कराने की चिंता करते हैं, जबकि वास्तविक विजय स्वयं को सत्य और धर्म के कवच से सुरक्षित करने में है। यदि व्यक्ति अपने स्वभाव, श्रद्धा और आत्मबल में अडिग हो जाए, तो संसार का कोई भी विरोध उसे विचलित नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा, “दुश्मनों की चिंता मत करो, परिस्थितियों की चिंता मत करो, अशुभ कर्मों की चिंता मत करो। केवल अपने धर्म, अपनी श्रद्धा और अपने आत्मविश्वास को मजबूत बनाओ। फिर कोई तुम्हारा कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगा।”
सर्व समाज सम्मेलन में पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया
दोपहर में आयोजित सर्व समाज सम्मेलन में केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने परम पूज्य गुरुदेव का पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और भावुक शब्दों में कहा कि गुना, अशोकनगर और मुंगावली क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु गुरुदेव के सान्निध्य का लाभ पा रहे हैं। अब उनकी हार्दिक इच्छा है कि शिवपुरी और ग्वालियर भी गुरुदेव के पावन चरणों से धन्य हों।

सिंधिया ने कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सिंधिया परिवार की तीन पीढ़ियों को गुरुदेव की सेवा का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। राजमाता विजयाराजे सिंधिया, स्वर्गीय माधवराव सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी गुरुदेव की सेवा में रहीं। अब वे चाहते हैं कि परिवार की चौथी पीढ़ी के युवराज को भी ग्वालियर में गुरुदेव की आगवानी का सौभाग्य मिले।


“धर्म किसी जाति का नहीं, श्रद्धा का विषय है”
मुनि पुंगव श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि धर्म किसी जाति, वर्ग या समुदाय की सीमाओं में बंधा नहीं है। धर्म तो केवल श्रद्धा और आस्था का विषय है। जिसने सच्चे मन से धर्म को स्वीकार किया, उसके जीवन में धर्म का प्रकाश स्वतः दिखाई देता है।


उन्होंने कहा कि मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि आत्मबल और संस्कारों के निर्माण का केंद्र है। व्यक्ति को ऐसा जीवन जीना चाहिए कि वह स्वयं के साथ-साथ समाज के लिए भी उपयोगी और उपकारी बने।

सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के प्रेरणादायी संदेशों को अत्यंत श्रद्धा और भाव-विभोर होकर सुना।
— संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312
