कोटा की पावन धरा पर धर्मरूपी त्रिवेणी का ऐतिहासिक महामिलन, भावविभोर हुआ हाड़ौती
कोटा। हाड़ौती की पावन धरा ने रविवार को एक ऐसे अलौकिक और ऐतिहासिक क्षण का साक्षात्कार किया, जिसने इसे धर्म, विनय और वात्सल्य की त्रिवेणी बना दिया। परम पूज्य मुनि श्री 108 निरोग सागर जी महाराज ससंघ, मुनि श्री 108 निष्पक्ष सागर जी महाराज, मुनि श्री 108 निस्पृह सागर जी महाराज तथा भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ का दुर्लभ समागम कोटा में संपन्न हुआ। यह दृश्य उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं के लिए जीवनभर की अविस्मरणीय स्मृति बन गया।
पिछले कई महीनों से हाड़ौती की धरती धर्ममय वातावरण से आलोकित है। एक ओर कोटा में विराजमान पूज्य मुनि श्री निरोग सागर जी महाराज ससंघ जैन धर्म एवं जैन शासन की प्रभावना को निरंतर नई ऊँचाइयों तक पहुँचा रहे हैं, वहीं भारत गौरव गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी अपने प्रेरणादायी प्रवचनों, धार्मिक आयोजनों और तप-साधना के माध्यम से समाज में धर्म-जागरण का कार्य कर रही हैं।


इसी क्रम में रामगंजमंडी में लंबे समय तक विराजमान रहे पूज्य मुनि श्री निष्पक्ष सागर जी महाराज एवं पूज्य मुनि श्री निस्पृह सागर जी महाराज ने भी अनेक ऐतिहासिक कार्यों को साकार किया। भगवान शांतिनाथ एवं कुंथुनाथ को दिव्य स्वरूप प्रदान करने का अद्वितीय कार्य हो अथवा भगवान अरहनाथ के नगर आगमन का सौभाग्य—इन उपलब्धियों ने रामगंजमंडी के धार्मिक इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया। इतना ही नहीं, नगर में बनने वाले भव्य जिनालय का भूमि-पूजन एवं शिलान्यास भी उनके पावन सान्निध्य में सम्पन्न हुआ।


रविवार प्रातः रामगंजमंडी से मंगल विहार करते हुए मुनि श्री निष्पक्ष सागर जी महाराज एवं मुनि श्री निस्पृह सागर जी महाराज का संघ कोटा की ओर अग्रसर हुआ। कॉमर्स कॉलेज चौराहे पर उनके गुरुभाई पूज्य मुनि श्री निरोग सागर जी महाराज ससंघ उनकी अगवानी के लिए स्वयं उपस्थित थे। जैसे ही दोनों मुनिसंघ आमने-सामने आए, गुरु भाइयों का वह वात्सल्यपूर्ण मिलन देखकर पूरा वातावरण जयघोषों से गूंज उठा। विनय, आत्मीयता और आध्यात्मिक प्रेम का यह अनुपम दृश्य हर श्रद्धालु के हृदय को स्पर्श कर गया।


इसी दौरान भारत गौरव गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी भी दर्शनार्थ पहुँचीं। उन्होंने अत्यंत विनयपूर्वक समस्त मुनिसंघ के चरणों में वंदन किया तथा श्रद्धाभाव से संघ की परिक्रमा की। इस दिव्य दृश्य ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। अनेक श्रद्धालुओं की आँखें नम थीं और वातावरण बार-बार जयघोषों से गूँज रहा था।
इसके पश्चात बैंड-बाजों एवं जयकारों के बीच समस्त मुनिसंघ का भव्य मंगल प्रवेश तलवंडी दिगम्बर जैन मंदिर में हुआ, जहाँ विशाल धर्मसभा आयोजित की गई।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए भारत गौरव गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने सम्यक दर्शन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सम्यक्त्व ही मोक्षमार्ग का प्रथम सोपान है। उन्होंने पूज्य मुनि श्री निष्पक्ष सागर जी महाराज ससंघ से स्वस्तिधाम तीर्थ एवं भगवान मुनिसुव्रतनाथ के दर्शन हेतु पधारने का विनम्र निवेदन भी किया। माताजी ने कहा कि वर्षों से इन मुनिराजों के दर्शन की अभिलाषा थी, जो आज पूर्ण हुई।
अपने मंगल प्रवचन में पूज्य मुनि श्री निष्पक्ष सागर जी महाराज ने कहा कि मुनि दर्शन अत्यंत दुर्लभ होते हैं और मुनियों की सेवा एवं सान्निध्य मानव जीवन को धन्य बना देते हैं। उन्होंने रामगंजमंडी में हुए ऐतिहासिक धार्मिक कार्यों की सराहना करते हुए श्री राकेश मडिया के समर्पण की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
वहीं पूज्य मुनि श्री निरोग सागर जी महाराज ने अत्यंत भावुक स्वर में कहा कि गुरुभाइयों से उनका यह महामिलन लगभग ढाई वर्ष बाद हुआ है। उन्होंने रामगंजमंडी में सम्पन्न हुए धार्मिक कार्यों की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।
इस ऐतिहासिक महामिलन के साक्षी बनने के लिए कोटा ही नहीं, बल्कि बूंदी, झालावाड़, रामगंजमंडी, भानपुरा सहित हाड़ौती एवं आसपास के अनेक क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। उपस्थित जनसमूह का मानना था कि ऐसा दिव्य, दुर्लभ और अलौकिक समागम विरले ही देखने को मिलता है।
सचमुच, रविवार का यह दिन हाड़ौती के धार्मिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो धर्म, ज्ञान, विनय और वात्सल्य की तीनों पावन धाराएँ एक साथ प्रवाहित हो रही हों और संपूर्ण वातावरण गुरु महिमा के प्रकाश से आलोकित हो उठा हो।
— अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी
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