आशीर्वाद मांगा नहीं जाता लिया जाता है सुधासागर महाराज
आगरा
हरीपर्वत में निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आर्शीवाद मांगा नहीं जाता और न दिया जाता है बल्कि आर्शीवाद लिया जाता है। गंदी आँख वाले को भगवान नहीं दिखते, साफ आँख वाले को पाषाण में ही भगवान दिख जाते हैं। बड़े आदमी अपनी मस्ती में मस्त रहते हैं, उसे गरीब का दुःख दर्द दिखाई नहीं देता है, भूखा आदमी भूखे की व्यथा समझता है, लेकिन सामर्थ्य नहीं अपाहिज के पास मदद करने की भावना है लेकिन मदद करने की सामर्थ्य नहीं, जितना नाव गरीब को दान करने का आता है यदि इतना भाव अमीर को आ जाये तो सभी में सम्पन्नता आयेगी। असमर्थ को सभी अच्छे भाव आते हैं, समर्थवान को किसी की मदद करने का भाव नहीं आता। ये भी ध्यान नहीं पैर के नीचे कोई मर तो नहीं रहा है। हम नहीं देख पाते हैं। प्रकृति से है कि जिनको समर्थ दिया उनको भावना नहीं दी। जो किस्तों में दान देते हैं, कमेटी यदि आपको असमर्थ मानकर दान किस्तों में देने को कहती है तो तुरन्त दान देवें, तो आपको अगले मयों में जब कोई कार्य करोगे तो निश्चित ही आपको तैयार धन नहीं मिलेगा। भारत में जन्मे 99% लोगों को जिन्दगी जीने का मतलब पता नहीं।
भारत में जन्म क्यों हुआ, विदेशों में क्यों नहीं, हमने कभी सोचा नहीं कि भारत में क्यों जन्म हुआ। जिन्दगी के उस चौराहे पर खड़े है. हमें जब बड़े हो जाते है तब पता चलता है कि मैं भारतीय हूँ। अब अभिषेक, व्रतों, दान, पूजा, उपवास, प्रवचनों से ऊब जाते हैं, वह व्यक्ति जिसको अभी तक कोई चोराया आया नहीं, यह ज्यादा मूर्ख नहीं हैं वह निगोदिया जीव है। एक श्वास में अठारह बार जन्म लेता है, हमें कोई रास्ता बताये, हम मंजिल तक पहुँच जायेगें। यदि हम स्वयं रास्ता बनायेगें तो मंजिल तक नहीं पहुँच पायेंगे। समर्थ को भाव बनाये, असमर्थ को शक्ति देवे दान की। धर्मसभा का शुभारंभ टीकमगढ़ की बालिका मंडलों ने सुंदर भक्ति गीत पर मंगलाचरण की प्रस्तुति के साथ किया|
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
