वर्षायोग चातुर्मास हेतु आर्यिका संघ को वर्षा योग हेतु निवेदन कर किया श्रीफल*भेंट धामनोद// दीपक प्रधान की विशेष रिपोर्ट
बड़वानी
आज दिगंबर जैन समाज बड़वानी द्वारा परम पूज्य आचार्यश्री 108आदिसागर जी महाराज अंकलीकर के मूल परम्परा के वर्तमान पट्टाचार्य और तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज के शिष्य प्राकृताचार्य 108 सुनील सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका105 सुप्रज्ञमति,अनघमति , संभवमति माताजी बड़वानी नगर में गत दिनों से विराजमान है
उन्हें इस वर्ष के मंगल वर्षायोग चातुर्मास हेतु निवेदन कर श्रीफल भेंट किया गया, यहां ये उल्लेखनीय है कि जैन संत चातुर्मास में एक ही स्थान पर अपनी तप आराधना,और साधना करते है और कुछ सीमा बाँध लेते है जिसके कि बाहर वो बिहार नहीं करते है, चातुर्मास अषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी से प्रारंभ कर के कार्तिक माह की अमावस्या पर समाप्त होता है कुछ संत सावन माह की एकम से चातुर्मास की स्थापना कर अपनी साधना करते है।
इन दिनों में धार्मिक कार्यक्रम, शास्त्र प्रवचन,अभिषेक,पूजन,स्वाध्याय,धर्म की क्लास प्रतिक्रमण आदि होते है जिसका की लाभ श्रमण के साथ श्रावक भी उठाते है।
