राष्ट्रीय पक्षी मयूर और जैन दृष्टि
भारत का राष्ट्रीय पक्षी मयूर (Indian Peafowl) केवल अपनी सुंदरता के कारण ही सम्मानित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति की समृद्धि और जैव विविधता का भी प्रतीक है।


हाल के “State of India’s Birds 2023” अध्ययन के अनुसार, जहाँ भारत की अधिकांश पक्षी प्रजातियाँ संख्या में घट रही हैं, वहीं मयूर उन कुछ पक्षियों में है जिनकी संख्या और विस्तार दोनों में वृद्धि दर्ज की गई है। लगभग 30,000 पक्षी-प्रेक्षकों के आंकड़ों पर आधारित इस अध्ययन में मयूर को “increasing trend” वाली प्रजातियों में बताया गया है।

जैन दर्शन प्रत्येक जीव में आत्मा का अस्तित्व स्वीकार करता है। मयूर भी एक त्रस जीव है, जो सुख-दुःख का अनुभव करता है और जीने की इच्छा रखता है। इसलिए अहिंसा केवल मनुष्य तक सीमित नहीं, बल्कि पक्षियों और अन्य जीवों तक भी विस्तारित है।


दिगम्बर जैन साधुओं की मयूर-पिच्छी भी इसी करुणा का प्रतीक है। इसमें उन्हीं पंखों का उपयोग किया जाता है जिन्हें मयूर स्वाभाविक रूप से समय आने पर स्वयं छोड़ देता है। न तो मयूर को पकड़ा जाता है और न ही उसे किसी प्रकार की हानि पहुँचाई जाती है।
इस प्रकार जैन परम्परा मयूर के प्रति श्रद्धा और अहिंसा दोनों का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती है।जब हम किसी मयूर को नृत्य करते देखते हैं, तब वह केवल एक सुंदर पक्षी नहीं, बल्कि प्रकृति के उस संदेश का दूत दिखाई देता है जो हमें सभी जीवों के प्रति दया, संरक्षण और सह-अस्तित्व का पाठ पढ़ाता है।
मनोज कुमार जैन बांकलीवाल कमलानगर आगरा
