पंचकल्याणक दिव्य मंत्रों की स्वर लहरियों ने लोगों को चमत्कृत करदिव्य मंत्रों की स्वर लहरियों ने लोगों को चमत्कृत कर दिया।

धर्म

पंचकल्याणक दिव्य मंत्रों की स्वर लहरियों ने लोगों को चमत्कृत दिया।

कुंजवन उदगांव
पंचकल्याणक महोत्सव में शनिवार को अलोकिक दिव्य मंत्रों की स्वर लहरियों ने लोगों को चमत्कृत कर दिया। मंत्रों की ध्वनियों के साथ लोगों ने अपने आपको उर्जा से लबरेज महसूस किया। उनके मन की शांति और उत्साह ने वातावरण को अनोखे रंगों से रंग दिया। हल्दी, चंदन के साथ अनोखी सुंगध के बीच सौधर्म इंद्र आदि पात्रों का मंगल स्नान की कियाएं हुई।

 

 

 

22 दिसंबर से प्रारंभ हुये कुंजवन महोत्सव में सुबह प्रभु आराधान के साथ ही दिव्य अलोकिक मंत्रों के उच्चारण ने वातावरण को खुशनुमा बना दिया। मौका था इंद्र इत्यादि पात्रों के हल्दी से मंगल स्नान का, इसमें हल्दी चंदन इत्यादि सुंगधित पदार्थों का उपयोग कर उनको उनको मंत्रों के बीच स्नान की कियाओं को किया गया।

 

 

यह सामन्य स्नान नहीं रहा, यह मंत्रों का स्नान था, मंत्रों के लगातार उच्चारण से उत्पन्न उर्जा की अनोखी अनुभूतियों का स्नान था। अनूठी अद्भुत सुंगंध का स्नान था। भक्तों की भावना का स्नान था। शक्ति की आराधना का स्नान था। इस अलोकिकता में हर कोई डूब रहा था। मंत्रों के साथ ही यज्ञदीक्षा की कियाएं हुई, इसमें इंद्र इत्यादि पात्रों से सहित भक्तों को भी इसका लाभ मिला। लगातार होने वाले मंत्र जाप का प्रभाव का लाभ भी भक्तजनों ने अर्जित किया। इसके बाद मौका था प्रभु के अभिषेक का, प्रभु अभिषेक की यह किया, लोगों के लिए अत्यंत हर्षित करने वाला था। अभिषेक दौरान हर्षित जनसमुदाय ने करतल ध्वनि के साथ अपने जोश और उत्साह दिखाया

 

 

 

 

 

 

 

 

यह सभी कार्यक्रम उत्कृष्ट सिंहनिष्कीडित व्रतकर्ता-साधना महोदधि आचार्यश्री 108 गुरूवर्य प्रसन्न सागर जी महाराज के सान्निध्य में हुये। आचार्य श्री के मुख से निकलते मंत्रो का स्नान कर भक्त कृतज्ञ होते रहे। दोपहर दो बजे गुरूवर्य श्री ने अपने प्रवचनों के माध्यम से लोगों को मंत्रों का महत्व एवं मत्रों की क्या शक्ति होती है। उसका वैज्ञानिक प्रभाव क्या है, जैसे विषय को सरलता से समझया। उन्होंने कहा कि मानव की वाणी का प्रभाव यह होता है कि अपने गैर हो जाते हैं और गैर अपने हो जाते हैं। गर वाणी सिर्फ शब्द ही है, सा मान्य शब्दों का जब मानव मन गहरा प्रभाव होता है उसी तरह मंत्रों का भी मानव के उ५. 2/3 होता है। मन दृश्य देखता है मंत्र अदृश्य रूप में काम करता है। विज्ञान दृश्य पर काम करता है अध्यात्म आदृश्य पर काम करता है। संध्याकाल में आनंद यात्रा में भक्तों ने अपने भावों को भजन आरतियों के माध्यम से प्रकट किया।

 

 

भक्त इस दौरान झूमते रहे, गाते रहे, नाचते रहे और भक्ति के नंद में खोते रहे। रात्रि में रंगारंग सांस्कृतिक समारोह की धूम रही, इसमें छोटे बच्चों ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर भक्ति की रस से लोगों के हृदय के तारों को शृंकत कर दिया। कार्यक्रम आयोजक श्री ब्रहम्नाथ पुरातन दिगंबर जैन मंदिर टस्ट कुंजवन उदगांव रहा। ग्रुप द्वारा सभी व्यस्थाओं का शानदार तरीके दायित्व निभाया। अधिक जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 8899344441 पर संपर्क किया जा सकता है।

आगामी कार्यकम

     

 

 

 

पीयूष कासलीवाल एवम नरेंद्र अजमेरा ने बताया कि 24 दिसंबर को तपस्वी सम्राट आचार्य सन्मति सागर महाराज समाधि महोत्सव 25 को जन मंगल मत्रानुष्ठान महोत्सव, 26 दिसंबर को यागमंडल विधान, गुरू कृपा व्रत संस्कार महोत्सव, 27 दिसंबर को मंदिर शुद्धि गर्भकल्याणक महोत्सव,28 दिसंबर को जन्मकल्याणक 29 दिसंबर दीक्षा कल्याणक होगा। यह सभी कार्यक्रम उत्कृष्ट सिंहनिष्किदित व्रतकर्ता-साधना महोदधि यह सभी कार्यक्रम उत्कृष्ट सिंहनिष्कीडित व्रतकर्ता-साधना महोदधि आचार्यश्री 108 गुरूवर्य प्रसन्न सागर जी महाराज के सान्निध्य में होंगें।

          संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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