भगवान महावीर का नाम उनके आचरण की वजह से अमर हैं साध्वी डॉ विद्युतप्रभा श्री जी
रामगंजमंडी
शहर के बाजार नंबर 3 में स्थित जैन श्वेतांबर मंदिर में विराजित साध्वी डॉ विद्युतप्रभा श्री जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि जिस प्रकार से साप अपनी केचुली का त्याग करके पीछे मुड़ कर भी नहीं देखता है उसी प्रकार परमात्मा महावीर स्वामी ने भी विशाल संपदा सुख वैभव को त्यागा तो दुबारा मुड़कर नहीं देखा। त्याग और तपस्या के कारण महावीर स्वामी का नाम अमर है।
परिवार, संपदा, पैसा, और पद साथ नहीं देते साध्वी जी
उन्होंने कहा की परिवार ,संपदा पैसा, पद की शरण से अच्छी परमात्मा की शरण है। उन्होंने इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के सर्वोच्च पद प्रधानमंत्री पद होने के बाद, पूरे परिवार के साथ होने के बाद, अपार संपत्ति होने के बाद भी उन्हें सुरक्षा नहीं मिल पाई। उन्होंने कहा जब तक आंख खुली है, संसार अपना है। सांस टूटते ही संसार पराया है, सपना है। गरीब हो, अमीर हो, बादशाह हो या सम्राट हो सबकी राख का कलर एक होता है। जिस व्यक्ति ने इंद्रिय और मन पर कंट्रोल कर लिया वह सबसे बड़ा सम्राट होता है। साध्वी जी ने प्रवचन में अपनी बुद्धि को बैंक में गिरवी रखकर नहीं आने की नसीयत भी दी। परमात्मा की देशना को दर्पण जैसा बताया।
तीन बैरागन बहनों का किया श्रीसंघ ने बहुमान
साध्वी श्री जी के साथ चल रही बाड़मेर की साक्षी सिंघवी, निशा बोथरा, भावना सकलेचा, जो बैरागन बहने हैं।वे निकट भविष्य में दीक्षा लेकर संयम पथ पर चलेंगी उनका भी श्रीसंघ की तरफ से बहुमान किया गया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
