दाहोद की पावन धरा पर रचा गया इतिहास, दो महान आचार्यों का हुआ महामिलन*

धर्म

*दाहोद की पावन धरा पर रचा गया इतिहास, दो महान आचार्यों का हुआ महामिलन* 

 

दाहोद (गुजरात), 17 जून 2026।

गुजरात की पुण्यभूमि दाहोद एक ऐतिहासिक एवं अविस्मरणीय आध्यात्मिक घटना की साक्षी बनी, जब अंकलीकर परंपरा के चतुर्थ पट्टाचार्य परम पूज्य आचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महाराज एवं अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज का भव्य महामिलन संपन्न हुआ। यह दुर्लभ मिलन लगभग 8 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हुआ, जिसने उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

 

 

महामिलन के दौरान आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज ने अद्भुत गुरुभक्ति का परिचय देते हुए आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के चरणों की वंदना की तथा उनका पादप्रक्षालन कर समस्त समाज के समक्ष विनय और श्रद्धा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि “बड़ों के सामने सदैव बालक बनकर जाना चाहिए, तभी जीवन में कुछ सीखने का अवसर प्राप्त होता है।” उन्होंने तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने समाज को केवल शेर नहीं, बल्कि आचार्य श्री सुनील सागरजी जैसे ‘बब्बर शेर’ प्रदान किए हैं।

वहीं आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज की कठोर तपस्या की प्रशंसा की तथा सभी श्रद्धालुओं से प्रत्येक माह कम से कम एक उपवास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “निरोगी रहने के लिए महीने में एक उपवास आवश्यक है।” साथ ही उन्होंने साधु-संतों में आपसी एकता और समन्वय पर बल देते हुए कहा कि यदि सभी साधु-संत इसी प्रकार मिल-जुलकर रहें, तो जैन समाज अपने पवित्र तीर्थस्थलों की रक्षा करने में निश्चित रूप से सफल होगा।Colorful poster advertising a print gallery with Buddha statues, saints, circular photo frames, a burger image, contact numbers, and an address at the bottom.

विशेष बात यह रही कि दाहोद आगमन की कोई संभावना नहीं थी, किंतु यह नगरी तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज की तपस्या-स्थली रही है। गुरुदेव की तपस्या का ही प्रभाव रहा कि दोनों महान संत इस पुण्यभूमि पर एकत्रित हुए और यह ऐतिहासिक महामिलन संभव हो सका।Smiling man with folded arms in a plaid shirt on the left; sunrise over mountains and a Hindi motivational quote on the right: 'जिनने धैर्य सीख लिया, उसने जीत का रास्ता पा लिया.'

इस दिव्य अवसर पर दाहोद सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे श्रद्धालुओं को इस अद्भुत दृश्य का साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। एक साथ लगभग 60 से 70 पिच्छियों के दर्शन होना पंचम काल में अत्यंत दुर्लभ माना जाता है, जिससे वातावरण आध्यात्मिक उल्लास से भर उठा।

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कार्यक्रम की अगली कड़ी में 18 जून को दोनों आचार्य संसंघ दाहोद नगर स्थित समस्त दिगम्बर जैन मंदिरों के दर्शन करेंगे। वहीं 19 जून 2026 को परम पूज्य आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज अपने श्रीमुख से वर्ष 2026 के चातुर्मास की घोषणा करेंगे। अब सम्पूर्ण जैन समाज की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस वर्ष चातुर्मास का सौभाग्य किस पुण्यशाली नगर को प्राप्त होगा।

दाहोद की धरा पर संपन्न यह महामिलन आने वाले वर्षों तक जैन समाज के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा।

 *– माही धीरावत*से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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