किसी भी गलत कार्य के प्रति प्रायश्चित कर लेना एक बहुत बड़ा तप है । स्वस्तिभूषण माताजी

धर्म

किसी भी गलत कार्य के प्रति प्रायश्चित कर लेना एक बहुत बड़ा तप है । स्वस्तिभूषण माताजी
केकड़ी
जाने अनजाने में भूलवश मानव गलती कर बैठता है, और कर्म रूपी बंधन से जकड़ जाता है ।
घर के कचरे के लिए प्रतिदिन सफाई की आवश्यकता है उसी प्रकार कर्मों की सफाई के लिए प्रभु भक्ति करना भी आवश्यक होता है ।
बोहरा कॉलोनी स्थित श्री नेमिनाथ जैन मंदिर के निकट शिवम वाटिका में आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने अपने धर्मोपदेश में कहे ।

 

उन्होंने कहा कि कर्मों की निर्जरा व आत्म विशुद्धि के लिए आलोचना, ,प्रतिक्रमण, प्रायश्चित एवं पश्चाताप सफल साधन है।           
किसी भी गलत कार्य के प्रति प्रायश्चित कर लेना एक बहुत बड़ा तप है ।स्वयं के सुख के लिए कभी भी पर को कष्ट पहुंचाने की चेष्टा नहीं करनी चाहिए ।

 

 

प्रातःकालीन शांतिधारा का सौभाग्य भाग चंद ज्ञान चंद सुनील कुमार जैन ज्वेलर्स परिवार को मिला ।
भगवान महावीर व आचार्य श्री के चित्र अनावरण व दीप प्रज्वलन तथा आर्यिका माताजी के पाद प्रक्षालन का पुण्यार्जन ओमप्रकाश गोविंद कुमार योगेश कुमार सदारा परिवार ने प्राप्त किया ।आर्यिका माता जी को शास्त्र भेंट शुभकामना परिवार के पार्श्र्वनाथ ग्रुप द्वारा किया गया ।

 

समाज के अध्यक्ष ज्ञान चंद जैन ज्वैलर्स व मंत्री कैलाश चंद जैन मावा वालों ने बताया कि भगवान मुनिसुव्रतनाथ विधान आर्यिका माताजी ससंघ के सानिध्य में आयोजित किया गया

 

 मीडिया प्रभारी रमेश बंसल व पारस जैन ने बताया कि बुधवार को मुनिसुव्रतनाथ भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव आर्यिका माताजी ससंघ के सानिध्य में रिद्धि सिध्दि मंत्रों के द्वारा 1008 रजत कलशों द्वारा महामस्तकाभिषेक एवं पालना झुलाने का कार्यक्रम शिवम वाटिका में आयोजित होगा ।
मीडिया प्रभारी रमेश बंसल
पारस जैन से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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