परम पूज्य आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में जैन युवा सेमिनार का हुआ शुभारभ युवाओं की देश और समाज को जरूरत है आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज

धर्म

परम पूज्य आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में जैन युवा सेमिनार का हुआ शुभारभ युवाओं की देश और समाज को जरूरत है आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज
रामगंजमंडी
परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज में शनिवार की बेला में जैन युवा सेमिनार का शुभारभ हुआ शुभारभ के क्रम में सर्वप्रथम आचार्य श्री 108 विराग सागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन किया गया जो बाहर से पधारे हुए धर्म प्रेमी बंधुओ ने किया इस सेमिनार में 150 अविवाहित युवक युवतियों ने भाग लिया यह सेमिनार रविवार तक चलेगा इस सेमिनार में युवाओं की वर्तमान सोच, धार्मिक सामंजस्य, और युवाओं के माता-पिता के प्रति कर्तव्य के विषय पर संबोधन दिया जाएगा।

 

 

 

समारोह कुशल संचालन श्रीमती सुधा चौधरी विदिशा ने किया।
सेमिनार में प्रशांत जैन आचार्य ने कहा सबसे बड़े मोटिवेशनल तो आचार्य परमेष्ठी मंच पर विराजमान आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज है। उन्होंने युवाओं की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि भरत चक्रवर्ती के सपनों में एक सपना था कि पंचम काल में युवा धर्म को लेकर उत्साहित रहेंगे उन्होंने कहा जब कोई महापुरुष अपनी दृष्टि नीचे करता है तो वह समाज कल्याण के लिए होती है। उन्होंने एक सूत्र दिया कि गुरु माता-पिता की बातों को कभी इग्नोर मत करना यदि इग्नोर करोगे तो सफल नहीं होंगे उनके विचारों के अनुभव को लाना युवाओं के लिए आवश्यक है।

 उन्होंने यह कहा कि माता-पिता की सलाह पर अमल करो। उनके अनुभव का लाभ उठाओ। उन्होंने वर्तमान परिवेश पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि कभी यह ना समझे की माता-पिता बूढ़े हो गए हैं आज वृद्धाश्रम खुलना इस द्योतक है आज वह है हो सकता है कल हम भी वहां हो। संचालन करते हुए सुधा चौधरी ने जो कहा वह सभी को भावुक कर गया घर की नेम प्लेट पर जो नाम लिखा है अभी अभी वह शख्स हमें वृद्धाश्रम दिखा है।

 

 

 

श्री ब्रह्मचारी नमन भैया ने कहा कि धर्म के विषय में बोलते हुए कहा कि धर्म का अर्थ संयम रखना कंट्रोल रखना है। दया आत्म निरीक्षण करना धर्म है। धर्म को रूटीन न समझे बल्कि उसे महसूस करो अपने व्यवहार में सत्य अहिंसा जैसे सिद्धांतों को उतारो युवा एक चेतना है तुम्हारे पास ऊर्जा है उसे उद्वेश्य चाहिए। उन्होंने एक लोकोक्ति के द्वारा कहा कि घुटनों से चलते-चलते पर इतने बड़े हो जाते हैं और छोटे-छोटे नियम एक दिन बहुत बड़े बन जाते हैं। यह युवा सम्मेलन गुरु अपने आत्म हित के लिए नहीं करवा रहे यह युवा सम्मेलन स्व पर कल्याण की भावना के लिए होता है। उन्होंने भी इन सभी विषयों पर बोलते युवाओ को मोटिवेशन दिया। उन्होंने कहा गुरु गाथा है इनसे प्रेरणा लो उन्होने कहा आज का युवा लॉजिक मांगता है हर चीज में जानना चाहता है सबसे बड़े वैज्ञानिक भगवान महावीर है जैन धर्म के सिद्धांत ने पहले ही बता दिया था कि एक बूंद अनझने पानी में 36450 जीव है विज्ञान भी उसे मानने लगा है।आचार्य श्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि योग्यता को निकालने के लिए सेमिनार होता है। सबसे अच्छी सलाह व्यक्ति स्वयं को स्वयं दे सकता है। सलाह भी आप पर ठीक है तो मानना चाहिए स्वयं को करने का अवसर देना चाहिए। उन्होंने कहा सब कुछ  बदलेगा हमें भी बदलना होगा।

उन्होंने का आज का युवा सही नहीं सोच पाता है नकारात्मक सोच और नकारात्मक विकल्प उसे अच्छे विकल्प का स्थान नहीं देता अच्छा कहते कहते चिड़चिड़ाने लगता है। लोगो को झूठ बोलने के लिए योजना बनानी पड़ती है सत्य बोलने के लिए कोई योजना नहीं बनानी पड़ती असत्य कहने के लिए योजना बनानी पड़ती है क्या बोलना है कैसे बोलना है। नकारात्मक सोच के विषय में गुरुदेव ने कहा कि नकारात्मक सोच स्वार्थ के कारण आती है। यदि हमारे विचार स्वार्थ पूर्ण होंगे तो नकारात्मक विचार आएगा ही। चाहत बहुत है लेकिन परिश्रम जीरो है। इतनी चाहत है कि सिकंदर भी पीछे छूट जाता है। सिकंदर संपूर्ण विश्व जितना चाहता है।

 

 

योग्यता का पता करो
आचार्य श्री ने कहा तुम्हें 13 से 35 साल हो गए जीवन जीते जीते लेकिन तुम्हें यह पता नहीं है कि तुम्हारी योग्यता कितनी है। जीते चले जाओगे मरते चले जाओगे लेकिन हाथ में कुछ नहीं आएगा।

घूम रहे पीछे रह गए सड़कों पर घूम रहे युवा उन्हें जॉब नहीं मिल रही है। । क्योंकि उनको योग्यता का पता नहीं। अपनी योग्यता को जान लेंगे तो कभी निराश नहीं होंगे चाल ढीली हो गति मंद हो लेकिन योग्यता मंद नहीं होनी चाहिए। हमारे पास योग्यता है तो मंद गति से भी योग्यता तक पहुंच सकते हैं।

आचार्य श्री ने युवाओं को धैर्यता रखने को कहा उन्होंने कहा कि यदि धैर्यता होगी तो हम सब कुछ कर सकते हैं। यदि नहीं रख पाओगे तो तुम्हारी मेहनत परिश्रम फेल हो जाएगी। उन्होंने कहा हारो मत एक दिन मंजिल मिलेगी। यदि धैर्यता है तो आप कहीं भी चले जाओ दुनिया के किसी भी कोने में आप सफल हो जाओगे। यह भी ध्यान में रखें जो मेरा है मुझे मिलेगा ही हो सकता है की देर हो जाए। उन्होंने लक्ष्य बनाने की भी बात कही पक्षी का उदाहरण देते हुए कहा कि पक्षी लक्ष्य लेकर उड़ते हैं और जब तक लक्ष्य तक नहीं पहुंचते उड़ान नहीं रोकते हैं। लक्ष्य सही नहीं तो मंजिल नहीं मिल सकती। उन्होंने गूगल से पढ़ना सबसे खराब बताया युवाओं की ताकत को परिवार देश समाज को जरूरत है। पूरा हिंदुस्तान युवाओं पर दृष्टि लगाए हुए हैं। पूरी सामाजिक दृष्टि इसी पर लगी हुई है। युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि इसके बावजूद आपकी सोच इतनी नकारात्मक है कि आपको किसी की जरूरत नहीं है। कितने गए बीते हो कि इनको हमारी जरूरत है तो मैं इनकी जरूरतो पर खरा उतरु। जो सबकी जरूरत का ध्यान रखेगा वह अपनी भी पूर्ति कर लेगा और दूसरे की भी कर देगा। लक्ष्य का ध्यान रखना चाहिए लक्ष्य तुम्हारे से 2 इंच दूर है, जीना सकारात्मक होकर ताकत और दम से जीना चाहिए।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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