– गुनिया नदी को गंदा करना बंद करें, एक दिन वह भी माता की तरह पूज्य होगी: मुनिश्री सुधासागर महाराज
गुना
परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 सुधासागर महाराज ने प्रकृति संरक्षण का भी दिया संदेश, और बोले- हर व्यक्ति जीवन में कम से कम छह पेड़ अवश्य लगाए महाराज श्री ने धर्मसभा में प्रकृति संरक्षण, नदी स्वच्छता और – मानवीय कर्तव्यों पर प्रेरक संदेश देते हुए कहा कि यदि गुना के – नागरिक गुनिया नदी में गंदगी और – दूषित पानी डालना बंद कर दें, तो एक दिन यह नदी भी माता के समान पूज्य बन सकती है।
भारतीय संस्कृति में नदियों को माता का दर्जा दिया गया है उन्होंने कहा कि नदियों का जल स्वभाव से पवित्र होता है, इसलिएभारतीय संस्कृति में उन्हें माता का दर्जा दिया गया है। मुनिश्री ने कहा कि उद्योगों और मानवीय लापरवाही के कारण गंगा, यमुना, नर्मदा जैसी पवित्र नदियां भी प्रदूषण की चपेट में आ गई हैं। जो नदियां कभी जीवनदायिनी मानी जाती थीं, आज उनका अस्तित्व संकट में है। 

उन्होंने कहा कि नदियों को प्रदूषित करना केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि मातृ स्वरूप प्रकृति का अपमान है। जो लोग नदियों को गंदा करते हैं, वे समाज और आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय कर रहे हैं। प्रकृति संरक्षण पर बल देते हुए मुनि श्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवनकाल में लगभग पांच बड़े पेड़ों का उपयोग कर उन्हें नष्ट कर देता है। इसलिए हर व्यक्ति को कम से कम छह पेड़ अवश्य लगाने चाहिए। पांच पेड़ प्रकृति से लिए गए संसाधनों की भरपाई के लिए और एक पेड़ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए लगाया जाना चाहिए।

माता-पिता और प्रकृति के उपकारों को याद रखने की सीख दी
उन्होंने माता-पिता और प्रकृति के उपकारों को याद रखने की सीख देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को यह विचार करना चाहिए कि उसे माता-पिता और प्रकृति से जो कुछ मिला है, उसके बदले उसने क्या लौटाया है। उपकारों को भूल जाना और केवल स्वार्थ में जीना पाप है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ अन्याय का परिणाम आज पर्यावरणीय संकट और प्राकृतिक आपदाओं के रूप में सामने आ रहा है। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और मुनि श्री के संदेश को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
