स्वस्ति भूषण माताजी का देई से केशवरायपाटन के लिए हुआ विहार निंदा की चिंता छोड़, कर्म करते रहो: स्वस्तिभूषण माताजी
देई
भगवान महावीर स्वामी महोत्सव के दूसरे दिन गणिनी आर्यिका 105 स्वस्ति भूषण माताजी ने देई से केपाटन के लिए विहार किया। विहार में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु उमड़े।नाईपुरा गांव में धर्मसभा को संबोधित करते हुए माताजी ने कहा कि सच्चा कर्मयोगी वही है जो परिस्थितियों और लोगों की राय से ऊपर उठकर अपनी जिम्मेदारी निभाता है।
इससे पहले, सोमवार रात नसियां मंदिर में महावीर जन्म कल्याणक के मौके पर महिला मंडल ने शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए, जिसमें समाज के महिला-पुरुष बड़ी संख्या में शामिल रहे।

माताजी ने कहा कि सूरज बिना रुके और बिना किसी स्वार्थ के सबको एक समान रोशनी देता है। उसे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन उसकी तारीफ कर रहा है और कौन बुराई। हमें भी दूसरों की बातों में आकर अपना लक्ष्य नहीं छोड़ना चाहिए।
पहला स्कूल है है परिवारः
परिवार मिलने वाले संस्कार ही इंसान की पहली शिक्षा हैं। स्कूल या किताबों का ज्ञान इसके बाद आता है। अगर संस्कार मजबूत हों तो इंसान हर मुश्किल में सही रास्ते पर चलता है।

प्रकृति सबसे बड़ी गुरुः
हमें सूरज से नियम, चांद से शीतलता, हवा से लगातार चलते रहना, धरती से सहनशीलता और नदियों से बहते रहने की सीख लेनी चाहिए।
श्रद्धा से खुद करें भक्तामर का पाठ, तभी होगा असर
माताजी ने युवाओं और श्रद्धालुओं को स्पष्ट संदेश दिया कि भक्तामर स्तोत्र का पाठ पूरी श्रद्धा और
एकाग्रता के साथ स्वयं करना चाहिए।
आजकल लोग मोबाइल पर पाठ सुन लेते हैं, लेकिन केवल सुनने से पूरा आध्यात्मिक लाभ नहीं मिलता। जब व्यक्ति खुद भावपूर्ण तरीके से उच्चारण करता है, तभी उसका सच्चा और सकारात्मक असर हमारे जीवन और विचारों पर पड़ता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
