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समर्पण का ऐसा दृश्य, जो शायद जीवन में एक बार ही देखने को मिलता है… श्रीश जैन ललितपुर की कलम से 

धर्म

समर्पण का ऐसा दृश्य, जो शायद जीवन में एक बार ही देखने को मिलता है..

गुना 

गुना की पावन धरा पर जो दृश्य देखने को मिला, वह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं था, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और समर्पण का जीवंत उदाहरण था। ऐसे क्षण बार-बार नहीं आते, जब किसी संत के प्रति लोगों की आस्था शब्दों से निकलकर निर्णयों का रूप ले लेती है।

 

 

 

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्यों में मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज का नाम ऐसा है, जिन्हें “जगत पूज्य” कहने भर से पूरा समाज पहचान जाता है। यह सम्मान किसी पद या उपाधि से नहीं मिला, बल्कि दशकों की साधना, त्याग, तपस्या और समाज के प्रति उनके समर्पण ने उन्हें लोगों के हृदय में यह स्थान दिलाया है।

 

 

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आज ऋषभोदय तीर्थ के निकट स्थित सीमंधर जिनालय के समस्त ट्रस्टीगण जब मुनि पुंगव श्री के समक्ष पहुंचे तो उनके मन में कोई आग्रह नहीं था, कोई स्वार्थ नहीं था। वे केवल एक भाव लेकर आए थे—धर्म की प्रभावना बढ़े, मंदिरों में पुनः पूजा-अभिषेक की ध्वनि गूंजे और जिनशासन की महिमा निरंतर बढ़ती रहे। इसी भावना के साथ उन्होंने जिनालय के अधिकारों और सम्पत्तियों को पुण्योदय तीर्थ, बजरंगगढ़ में समाहित करने का निवेदन किया।Advertisement for Sudha Amrut mustard oil showing yellow background, mustard seeds, oil bottles and price/pack sizes; highlights 100% mustard oil and FSSAI mark.

 

यह दृश्य जितना सरल दिखाई दे रहा था, उसका महत्व उतना ही असाधारण था। अपने जीवन में मैंने अनेक धार्मिक आयोजन, प्रतिष्ठाएं और निर्णय देखे हैं, लेकिन ऐसा प्रसंग पहली बार देखा, जहां किसी जिनालय के जिम्मेदार लोग स्वयं आगे बढ़कर सम्पूर्ण अधिकार समर्पित करने का निवेदन कर रहे हों। यह किसी दबाव का परिणाम नहीं था, यह श्रद्धा का निर्णय था। यह किसी व्यक्ति की विजय नहीं थी, यह धर्म और विश्वास की विजय थी।Colorful poster advertising a print gallery with Buddha statues, saints, circular photo frames, a burger image, contact numbers, and an address at the bottom.

 

जब समाज किसी संत के प्रति इतना विश्वास व्यक्त करता है कि अपनी सबसे मूल्यवान धरोहर भी उनके मार्गदर्शन में सौंपने को तैयार हो जाता है, तब समझना चाहिए कि वह संत केवल व्यक्ति नहीं रह जाता, वह एक संस्था, एक प्रेरणा और एक विश्वास का नाम बन जाता है।

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आज का यह प्रसंग आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की दूरदृष्टि को भी प्रणाम करने का अवसर है। उन्होंने केवल साधु नहीं बनाए, उन्होंने ऐसे व्यक्तित्व गढ़े जो समाज को जोड़ने, दिशा देने और धर्म की प्रभावना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का सामर्थ्य रखते हैं।

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सच कहूं तो आज का यह दृश्य देखकर मन बार-बार यही सोच रहा था कि हम कितने सौभाग्यशाली हैं। हमें उस युग में जन्म लेने का अवसर मिला, जब आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज जैसे महापुरुष इस धरती पर थे, और हमें उस काल का भी साक्षी बनने का सौभाग्य मिल रहा है, जब मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज अपने तप, त्याग और प्रभाव से लाखों लोगों के जीवन में श्रद्धा का दीप प्रज्वलित कर रहे हैं।

Smiling man in plaid shirt with folded arms beside a sunset mountain scene and inspirational text in Hindi/ Punjabi on the right.

वर्षों बाद जब इतिहास इस कालखंड को याद करेगा, तब शायद यह भी लिखा जाएगा कि कुछ निर्णय कागजों पर नहीं होते, वे सीधे हृदय में लिखे जाते हैं। गुना में आज हुआ यह समर्पण भी उन्हीं घटनाओं में से एक है, जिसे समय बीतने के बाद भी लोग श्रद्धा और आश्चर्य के साथ याद करेंगे।

 

#श्रीश ललितपुर

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