पर्यावरण संरक्षण: वर्तमान की जिम्मेदारी, भविष्य की सुरक्षा मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज
गिरीडीह, मधुवन।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मधुवन स्थित गुणायतन परिसर में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि यदि आज हम पर्यावरण के प्रति उदासीन बने रहे, तो आने वाली पीढ़ियों के प्रति यह हमारा एक बड़ा अपराध होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन सम्पूर्ण विश्व के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। बढ़ती ग्रीनहाउस गैसें, ओजोन परत को होने वाली क्षति तथा निरंतर बढ़ता प्रदूषण मानव सभ्यता के सामने अनेक चुनौतियाँ खड़ी कर रहा है। इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
मुनिश्री ने कहा कि वृक्ष मानव जीवन के सबसे बड़े मित्र हैं। वे केवल प्राणवायु ही नहीं देते, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान करते हैं। वर्तमान समय में वृक्षों की अंधाधुंध कटाई अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण दिवस पर वृक्षारोपण का संकल्प सराहनीय है, किंतु उससे भी अधिक आवश्यक पहले से मौजूद वृक्षों का संरक्षण है। नए पौधे लगाने के साथ-साथ पुराने वृक्षों को बचाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को बेहतर बनाने के लिए विश्वभर में बड़ी संख्या में वृक्षों की आवश्यकता है। यह लक्ष्य तभी संभव हो सकता है जब हम वृक्षारोपण के साथ-साथ वर्तमान हरित संपदा की रक्षा करें। यदि मौजूदा वृक्षों की कटाई नहीं होगी और उन्हें सुरक्षित रखा जाएगा, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह सबसे प्रभावी कदम सिद्ध होगा।

मुनिश्री ने पर्यावरण संरक्षण के व्यावहारिक उपायों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि घरों की छतों पर पौधे, फूल, सब्जियाँ तथा अन्य हरित वनस्पतियाँ लगाकर भी वातावरण की शुद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अनेक देशों, विशेषकर जापान में, “ग्रीन रूफ” अर्थात हरित छतों की अवधारणा पर व्यापक कार्य किया जा रहा है। यह व्यवस्था पर्यावरण को लाभ पहुँचाने के साथ-साथ तापमान नियंत्रण में भी सहायक सिद्ध होती है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण का मित्र बनना चाहिए और उसकी रक्षा के लिए जो भी संभव हो, वह प्रयास करना चाहिए। आज मनुष्य अपनी सुविधाओं के लिए अनेक साधन जुटा लेता है, लेकिन उनके पर्यावरणीय प्रभावों के प्रति पर्याप्त सजग नहीं रहता। एयर कंडीशनर जैसी सुविधाएँ जीवन को आरामदायक बनाती हैं, किंतु इनके अत्यधिक उपयोग से ऊर्जा की खपत बढ़ती है और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए हमें अपनी सहनशक्ति बढ़ाते हुए प्राकृतिक जीवनशैली को अपनाने का प्रयास करना चाहिए।

अपने उद्बोधन के समापन में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा तभी संभव है जब जल, वायु, ऊर्जा तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों का संयमित और विवेकपूर्ण उपयोग किया जाए। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे सकारात्मक परिवर्तन लाए, तो सामूहिक प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का बड़ा लक्ष्य सहज ही प्राप्त किया जा सकता है।

आज आवश्यकता केवल चर्चा की नहीं, बल्कि निरंतर और सार्थक प्रयासों की है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण प्रदान किया जा सके।
राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
