मनुष्य भव ही श्रेष्ठ है मात्र मनुष्य गति में ही प्राणी संयम धारण कर सकता है वर्धमानसागर महाराज
पारसोला
पंचम पट्टाघीश आचार्य वर्धमानसागर जी धरियावद के पारसोला कस्बे में संघ सहित वर्षायोग हेतु विराजित है आज की धर्म सभा में आचार्य श्री ने मोक्ष मार्ग कैसे प्राप्त किया जाता है, चारों गति में कौन सी गति श्रेष्ठ है, कौन सा वर्ण के व्यक्ति संयम धारण कर सकते हैं ,पुण्य की प्राप्ति कैसे होती है , मनुष्य गति क्यों श्रेष्ठ है,चातुर्मास में कितने पर्व आते हैं इन सब की विवेचना धर्म देशना में की ।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रवचन में बताया कि वीतरागी ,सर्वज्ञ हितोपदेशी तीर्थंकर भगवान अपनी दिव्य देशना से सभी प्रकार की गतियो नरक गति छोड़कर,के जीवों को धर्म की देशना एक समान देते हैं भगवान के सम्मुख समवशरण में नरक गति छोड़कर तीनों गति के जीव देखने सुनने हेतु पात्रता रखते हैं समवशरण के 12 कोठों में आठ कोठों में देवगती के जीव मुनि एक कोठे में आर्यिका और श्राविकाएं एक कोठे में तिर्यच एक कोठे में और मनुष्य एक कोठे में धर्म का श्रवण करते हैं।
यह धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने धर्म सभा में प्रकटकी। राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि मनुष्य भव ही श्रेष्ठ है मात्र मनुष्य गति में ही प्राणी संयम धारण कर सकता है। देवगति में संयम धारण करने की पात्रता नहीं है ,और मोक्ष जाने की योग्यता और पात्रता संयम धारण करने वाले प्राणियो को होती है। आचार्य श्री ने बताया कि मोक्ष जाना इतना आसान नहीं है पारसोला शब्द का शाब्दिक विश्लेषण करते हुए आचार्य श्री ने बताया कि 16 पहाड़ियों के मध्य पर पारसोला स्थित है संसारी प्राणी समुद्र नदी किनारे खड़े हैं दूसरे किनारे पार होने के लिए वह जाना चाहते हैं संसार समुद्र से पार होना चाहते हैं मनुष्य गति में ही मोक्ष प्राप्त करने का पुरुषार्थ करने की पात्रता है। 84 लाख योनियों में भ्रमण कर दुर्लभतम मनुष्य पर्याय मिली है 84 लाख योनियों के विश्लेषण में आचार्य श्री ने बताया कि एक इन्द्रिय जीव फिर त्रस जीव दो इंद्रीय से पांच इंद्रीय में पांच इंद्रीय में सैनी और असैनी जीव होते हैं पंचेेंद्रीय में सैनी जीव में मन होता है जिनके मन होता है उनमें उपदेश ग्रहण करनेकी शक्ति और सामर्थ धर्म अर्थात सम्यक दर्शन , सम्यक ज्ञान ,सम्यक चारित्र के पुरुषार्थ से मोक्ष मार्ग की राह

आसान होती है ।चारों गति की विवेचना में बताया केवल गति मे देव शास्त्र गुरु और जिनेंद्र भगवान की शरण और उनके द्वारा प्रतिपादित धर्म पूर्वक संयम को धारण करने से मोक्ष मार्ग आसान होता है। पहले जैन समाज के लोग 4 करोड़ से अधिक थे आज 40 लाख भी जैन नहीं है मनुष्य पर्याय , में तीर्थंकर जैन कुल दुर्लभता से मिलता है।
णमोकार मंत्र का जाप किस प्रकार करना चाहिए कोई सा भी जाप मन की स्थिरता एकाग्रता से करने से फल मिलता है इसलिए मन में विचारों की भीड़ हटाना होगी ।चातुर्मास में अनेक पर्व आते हैं कुछ दिनों बाद मोक्ष सप्तमी आएगी फिर रक्षाबंधन पर्व आएगा दशलक्षण पर्व में भी अनेक पर्व आएंगे इन धार्मिक पर्व से आप परिणाम में निर्मलता बनाकर देव
शास्त्र गुरु के वचनों को मनन चिंतन करें संयम वह मार्ग है जिससे आप मनुष्य जन्म को सार्थक कर सकते हैं।आज सीकर नगर से भक्तों ने पधार कर आचार्य श्री की गुरु भक्ति कर चरण प्रक्षालन जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त किया। शाम को श्री जी की आरती के पश्चात आचार्य श्री की संगीत मय आरती भक्ति होती हैराजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
