संत सुरक्षा के लिए समाज को निरंतर जागरूक रहना होगा- मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज(अविनाश जैन विद्यावाणी)
गिरीडीहः-
गुणायतन प्रणेता राष्ट्रीय संत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने सांयकालीन शंकासमाधान में रीवा आर्यिकाओं की अकाल समाधि के संद्रभ में मध्यप्रदेश शासन द्वारा एस आई टी गठन के पश्चात प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि“हमें केवल प्रतीक्षा नहीं,हमें समाधान चाहिए, मुनि श्री ने कहा कि हर वर्ष इस प्रकार की घटनाएँ होती रही हैं, पहले लोग अपने-अपने स्तर पर विरोध और शिकायत कर शांत हो जाते थे, लेकिन इस बार संत समाज के लिये जैन समाज जागरूक हुआ है, मुनि श्री ने कहा कि आप लोगों को मुनि संघ की प्रेरणा मिली और उसी प्रेरणा के बल पर जैन समाज ही नहीं अपितु संयुक्त रुप से सभी अहिंसक समाज ने एक सशक्त प्रदर्शन कर अपनी एकता, निष्ठा और दृढ़ता का परिचय दिया।
परंतु केवल इतना पर्याप्त नहीं है। हमारा उद्देश्य तभी पूर्ण होगा जब ज्ञापन में रखी गई सभी मांगों की पूर्ति हो जिससे आगे इस प्रकार की कोई घटना न हो।”इसके लिये समाज को अब निरंतर सक्रिय रहना होगा। केवल दोषियों को दंड दिलाकर शांत बैठ जाना हमारा लक्ष्य नहीं, भविष्य में किसी भी परंपरा के मुनि एवं साध्वियों के साथ ऐसी घटनाएँ दोबारा घटित न हों मुनि श्री ने कहा कि इसी उद्देश्य को लेकर “राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान” को व्यापक रूप देने की बात कही गई एवं पांच सुत्रीय मांग पत्र भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार के साथ सभी सम्वैधानिक संगठनों भी दिया गया है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा एसआईटी गठित कर जांच प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है, जो सकारात्मक कदम है, लेकिन समाज का लक्ष्य इससे कहीं और बड़ा है। सरकार को संत सुरक्षा के लिए ठोस नीतियाँ बनानी चाहिए तथा ज्ञापन में प्रस्तुत मांगों को प्रभावी रूप से लागू करना चाहिए। इसके लिए सभी धर्मों एवं वर्गों के लोगों को इस अभियान से जोड़ने की आवश्यकता है, मुनि श्री ने समाज की भूमिका पर विशेष बल देते हुए कहा गया कि केवल सरकार से मांगें मनवा लेना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि समाज में भी व्यापक जागरूकता आना आवश्यक है।




उन्होंने कहा कि समाज स्तर पर कौन-कौन से कदम उठाए जाएँ, इस पर मंथन जारी है और शीघ्र ही आगे की रणनीति समाज के समक्ष रखी जाएगी, उन्होंने कहा कि
समाज को अपनी भावनाओं और जागरूकता को निरंतर बनाए रखें तथा यह संकल्प लें कि अब किसी भी संत या साध्वी को असमय मृत्यु का शिकार नहीं होने देंगे। तथा मुनिराजों के आहार, विहार एवं निवास आदि सभी व्यवस्थाओं में सक्रिय सहयोग देंगे मुनि श्री ने कहा कि यदि यही भावना प्रत्येक व्यक्ति में विकसित होगी तभी हम सच्चे देव, सच्चे गुरु और सच्चे धर्म के वास्तविक उपासक बन सकेंगे। उपरोक्त जानकारी राष्ट्रपति प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने दी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
