जब समय खराब आने वाला होता है तो शुरुआत..वाणी के असंयम और दृष्टि दोष-ग्राही हो जाती है..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
औरंगाबाद/गाजियाबाद। अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ तरुणसागरम तीर्थ पर विराजमान हैं। उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा किसी विचारक ने आदमी की उपमा नदी से की है। जैसे नदी सीधी नहीं बहती, उसकी चाल टेढ़ी-मेढ़ी होती है। वक्रता नदी का स्वभाव है। उसी तरह आदमी के जीवन में भी उतार चढ़ाव, बैर-विरोध, सहर्ष में – संघर्ष के भाव पैदा होते रहते हैं, और आदमी के वाणी-व्यवहार में गिरावट आने लगती है।
फिर हमारा दृष्टिकोण दूसरों के क्रिया कलापों में दोष देखने को लालायित रहने लगती है और हम सबसे श्रेष्ठ है,, यह श्रेष्ठ होने का भाव दूसरों में दोषारोपण साबित करने में और कमी – दोष खोजने में मशगूल हो जाता है और इससे ही उसे मन की आत्मिक शान्ति मिलती है। *यह एक निन्दा रस है, इस रस से आदमी के अहंकार की पुष्टी होती है। इसे ही आचार्यों ने मन का द्वेष और मन का कालुष्य कहा है।




किसी निर्दोष-गुणवान व्यक्ति ने अपने मित्र को भोजन के लिए निमन्त्रण दिया। उसने भोजन किया और जाने लगा तब उस निर्दोष व्यक्ति ने पूछा – भोजन में कोई कमी तो नहीं थी-? उसने कहा – और तो सब अच्छा था लेकिन इतना अच्छा भी नहीं होना चाहिए था। जब समय खराब होता है तो लोग हाथ नहीं गलतियां पकड़ते हैं। सौ बात की एक बात_ -खुश होना है तो तारीफ सुनिए और बेहतर होना है तो निंदा…!!!
आज अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ससंघ की अहिंसा संस्कार पदयात्रा। दिशा- जयपुर, राजस्थान की ओर मंगल विहार
परम पूज्य गुरुदेव अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज जी ससंध का भव्य मंगल 👣 पद विहार दिनाँक 3 जनवरी 2026, शनिवार दोपहर 2.00 बजे तरूणसागरम् तीर्थ, (रेपिट मेट्रो पिलर नम्बर 807),बसंतपुर सैंतली, मुरादनगर जिला-गाजियाबाद सेप्रेजिडियम स्कूल, NH-58, दिल्ली मेरठ रोड (रैपिड मेट्रो पिलर 652 के सामने ), राजनगर एक्टेशन, जिला गाजियाबाद 7 किलोमीटर के लिए होगा
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

