सकल वागड़ जैन समाज ने श्री सुधा सागरजी महाराज को चातुर्मास के लिए किया श्रीफल भेंट सुरेशचंद्र गांधी नौगामा जिला बांसवाड़ा राजस्थान
बांसवाड़ा ।
अशोकनगर में गुंजने लगा वागड़ में हो चौमासा। बुधवार की प्रातःकालीन बेला में अशोकनगर जिले में वागड़ जैन समाज पहुंची तो हर तरफ एक ही गुंज थी कि शायद इस बार वागड़ का सौभाग्य जागने वाला है । सकल वागड़ जैन समाज के लोग जिसमें
आनंदपुरी,गढ़ी ,परतापुर,आदिनाथ कॉलोनी,
तलवाड़ा,बाहुबली कॉलोनी,ठिकरिया,खांदू कॉलोनी, बड़ोदिया ,घाटोल,सेनावासा,पीपलखुट,नौगामा, बागीदौरा ,कालिंजरा,चंदूजी का गड़ा के अलावा और भी गांवो के लोग वीरोदय तीर्थ क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष मोहनलाल पिंडारमिया व उपाध्यक्ष धनपाल लालावत के सानिध्य में अशोकनगर पहुंचे जहां पर विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज को वागड़ में आगमन व वीरोदय तीर्थ पर चातुर्मास के लिए सभी ने श्रीफल भेंट किया ।
सकल वागड़ जैन की भावनाओं को देखते हुए प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया सुयश अशोकनगर ने मुनि श्री से सबसे पहले निवेदन करते हुए कहा कि गुरूदेव आप सबसे पहले वागड़ पधारो उसके बाद आपकी जहां भावना हो चातुर्मास करो भैय्याजी के निवेदन पर सभी भक्तों ने यही कहा कि इस बार वागड़ में हो चौमासा और सभी ने गुरूवर के चरणों में भक्ति कर अर्घ्य चढ़ाया ।

इस दौरान वागड़ के सभी गांवों की भावना को अपने शब्दों से बखान करते हुए सुशांत मालवीया खांदु कालोनी ने कहा कि
मुर्तियां तो सज गई गुरूवर पर प्राण फुंकना बाकी है, वागड़ की उस सुखी धरा पर अमृत बरसाना बाकी है ।
वीरोदय में चातुर्मास कर, हे दया सिन्धु , दया के सागर तुम भक्तों की झोली को भरपूर करो। सुशांत मालवीया ने बीते स्मरण को याद करते हुए बताया कि गुरूदेव आज से 19 वर्ष पहले 28 जुलाई को आपका खांदु कालोनी में चातुर्मास मंगल प्रवेश हुआ था और इस वर्ष भी चातुर्मास स्थापना 28 जुलाई को है और हम सब वागड़वासी हनुमान रूपी भक्त, हमारे भगवान रूपी श्रीराम के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे हैं ।

तीर्थ कमेटी उपाध्यक्ष राजेश गांधी व संकेत जैन ने बताया कि सकल वागड़ जैन समाज भक्त सफेद वस्त्रो में, सर पर सफेद टोपी पहने जिस पर लिखा था गुरूदेव वागड़ पधारो चार से पांच बड़े विशाल आकार के सुसज्जित श्रीफल तेयार कर गुरूदेव के चरणों में भेंट किए । अनिल जैन, रजनीश वगेरिया, निकुंज शाह, चिराग दोसी, प्रद्युमन शाह, हुकमीचंद शाह ने सभी तैयारियां पूर्ण की।


इस अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव सुधा सागरजी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आत्मचिंतन, भक्ति और जीवन मूल्यों पर प्रेरणादायक संदेश दिया। मुनिश्री ने कहा कि व्यक्ति को सृष्टि बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, बल्कि स्वयं को सोने के समान गुणवान और मजबूत बनाना चाहिए। जैसे सोना कीचड़ में पड़े रहने पर भी वर्षों बाद अपनी चमक नहीं खोता, वैसे ही अच्छे संस्कार और आत्मबल रखने वाला व्यक्ति हर परिस्थिति में अपनी पहचान बनाए रखता है। उन्होंने कहा कि भगवान से पहले अपने नमोस्तु और अपनी सच्ची भक्ति पर विश्वास जरूरी है। यदि भक्ति निष्कपट और सच्चे मन से की जाए तो जीवन के हर कार्य में सफलता मिलती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
