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साबला से बेणेश्वर धाम तक आचार्य पुलक सागर महाराज का मंगल विहार, श्रद्धालु हुए भावुक संत एक स्थान पर नहीं रुकते, सतत विहार ही साधु जीवन की पहचान: आचार्य पुलक सागर

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साबला से बेणेश्वर धाम तक आचार्य पुलक सागर महाराज का मंगल विहार, श्रद्धालु हुए भावुक

संत एक स्थान पर नहीं रुकते, सतत विहार ही साधु जीवन की पहचान: आचार्य पुलक सागर
साबला
राष्ट्रसंत आचार्य श्री 108 पुलक सागर महाराज का का मंगलवार सुबह 5:30 बजे साबला स्थित पद्म प्रभु दिगम्बर जैन मंदिर से मंगल विहार हुआ। आचार्य का बेणेश्वर धाम में मंगल प्रवेश होने पर श्रद्धालुओं ने श्रद्धा व भक्तिभाव से अगवानी की। ।

 

 

आचार्य श्री के विहार के समय श्रद्धालु भावुक हो उठे और उनकी आंखें नम हो गईं।आचार्य श्री साबला में 27 दिनों तक विराजमान रहे उन्होंने हवन, संस्कार शिविर, धार्मिक प्रवचन व आनंद यात्रा जैसे विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को धर्म, संस्कार और आध्यात्मिक जीवन का संदेश दिया।

 

प्रवचनों और शिविरों से महिला पुरुषों सहित युवाओं को
विशेष लाभ मिला व पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का वातावरण बना रहा। आचार्य ने बेणेश्वर धाम पर भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक व पूजा-अर्चना कर धर्मसभा को संबोधित किया।Promotional collage advertising astrological advice, featuring a woman's portrait on the left, a decorative lit diya with rose petals on the right, and bold text including the phone number 6377240323.Golden advertisement for an 8×10 inch Premium LED Light Frame featuring Buddha and listed features like UV Print, waterproof, and contact info on the postery background.

 

अपने प्रवचन में आचार्य ने कहा कि जैसे नदियों का संगम होता है, वैसे ही साधु और श्रावकों का भी संगम होता है। नदी किसी के घर नहीं जाती, बल्कि प्यासा व्यक्ति स्वयं नदी तक पहुंचकर अपनी प्यास बुझाता है। उसी प्रकार संत भी समाज को ज्ञान और संस्कार देने के लिए देश-देशांतर में भ्रमण करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति, वायु और नदियां बिना बोले भी हमें चलते रहने का संदेश देती हैं। संत एक स्थान पर अधिक समय तक नहीं रुकते, क्योंकि सतत विहार ही साधु जीवन की पहचान है।

 

उन्होंने कहा कि “प्राण जाए पर वचन न जाए” भारतीय संस्कृति की सनातन परंपरा रही है। मंगलवार शाम आयोजित आरती में भी साबला जैन समाज केमहिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बुधवार सुबह 5:30 बजे आचार्य का बेणेश्वर से विहार होकर गांव करमोटा टांडा में मंगल प्रवेश हुआ।

 

 

इसके बाद बामनपाड़ा पहुंचकर वहां से विहार करते हुए घाटोल की ओर प्रस्थान करेंगे। साबला समाज के श्रद्धालु प्रतापगढ़ तक आचार्य के साथ रहेंगे। आचार्य का आगामी चातुर्मास भीलवाड़ा में होना प्रस्तावित है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312♦

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