Group of men walking in a street procession, some in white traditional attire, onlookers in the background.

रामगंजमंडी से आत्मविश्वास लेकर जा रहे हैं, एकता और अपनेपन ने जीता मनः आचार्य आनंदचंद्र सागर 

धर्म

रामगंजमंडी से आत्मविश्वास लेकर जा रहे हैं, एकता और अपनेपन ने जीता मनः आचार्य आनंदचंद्र सागर

रामगंजमंडी

निमाणा से कोटा की ओर विहार के दौरान आचार्यश्री आनंदचंद्र सागर सूरीश्वर महाराज का प्रथम पड़ाव शनिवार को दरा में रहा। दीक्षा महोत्सव के उपलक्ष्य में रामगंजमंडी में आचार्यश्री का 10 दिवसीय प्रवास स्मृतियों के साथ संपन हुआ।

 

 

 

विहार के दौरान निमाणा तक साथ आए श्रद्धालु समूह को संबोधित करते हर हुए आचार्यश्री ने अपने अंतर्मन की भावनाओं को रोचक और आत्मीय ढंग से व्यक्त किया। श्रद्धालुओं को त्र, संबोधित करते हुए कहा कि हम रामगंजमंडी आने से पहले कुछ संशय (कन्फ्यूजन) में थे। हमें लगता था कि यह म्यूट रामगंजमंडी होगा। यहां के मंगल प्रवेश में आपकी एकता और सामूहिकता देखकर लगा कि यह तो क्यूट रामगंजमंडी है। शोभायात्रा के दौरान उमड़े जनसैलाब के उत्साह ने इसे पलूट रामगंजमंडी बना दिया। आज 8किलोमीटर की पैदल यात्रा में श्रद्धालुओं का जो अनन्य अपनापन दिखा, उसे देखकर मैं गर्व से कहता हूं कि सेल्यूट रामगंजमंडी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वे यहां संशय लेकर आए थे। समाज की अटूट श्रद्धा देखकर अब पूर्ण आत्मविश्वास (कॉन्फिडेंस) लेकर प्रस्थान कर रहे हैं।

 

 

 

शनिवार को निमाणा से दरा स्टेशन चौराहा तक लगभग 22 किलोमीटर का पैदल विहार पूर्ण हुआ। गुरुदेव का प्रथम पड़ाव दोपहर में दरा गांव में रहा। रात्रि विश्राम दरा स्टेशन पर हुआ।

 

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विहार समिति के भानु जैन एवं विजयपाल कीमती के अनुसार, इस विहार में प्रेमचंद छाजेड़, विजय कुमार छाजेड़, राजकुमार बोथरा, नरेंद्र मेहता, राजेश लोढ़ा, विनय डांगी, संजय विजावत सहित समाज के सैकड़ों लोग एवं मातृशक्ति पैदल चलते हुए गुरुदेव की अगवानी में शामिल रहे।

 

 

आचार्यश्री ने दीक्षा महोत्सव के आयोजक शासन रत्न मेहता परिवार की सेवाओं को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि मेहता परिवार त्याग, तपस्या, साधना और आराधना का पराक्रमी परिवार है।

 

 

इनके पुरुषार्थ से यह महोत्सव सफल हुआ। इस दीक्षा महोत्सव की अमिट स्मृतियां सदैव हृदय पटल पर अंकित रहेंगी। विहार के दौरान विदाई का दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाला था। संगीता पाटीदार ने गुरुदेव जा रहे तुम… गुरुदेव रो रहे हम… भजन की प्रस्तुति दी। अंशुल मेहता ने स्वरचित कविता के माध्यम से गुरु महिमा का गुणगान किया।

 

हुकम बाफना ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के सान्निध्य में 10 दिन कैसे बीत गए, इसका आभास ही नहीं हुआ। संचालन प्रकाश धारीवाल ने किया। कौशल बाफना ने भी संबोधित किया।

 

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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