किसी भी प्राणी के शरीर के अंग नेत्र,आदि विच्छेद करने से वह जीव अगले जन्म में अंधा,लूला, लगड़ा विकलांग होता हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

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किसी भी प्राणी के शरीर के अंग नेत्र,आदि विच्छेद करने से वह जीव अगले जन्म में अंधा,लूला, लगड़ा विकलांग होता हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी।

पारसोला आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की परंपरा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का पारसोला के लिए बिहार चल रहा है ।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 28 फरवरी को पारसोला में भव्य मंगल प्रवेश होगा ।बिहार के दौरान निकट के राजकीय छात्रावास में प्रवचन में बताया कि किन कर्म से प्राणी अंधा , लूला ,लंगड़ा एवं अपंग विकलांग होता है ।आचार्य श्री ने स्पष्ट करते हुए बताया कि जो पुरुष बलपूर्वक दूसरों के नेत्र फोड़ देता है, अथवा सुंदर स्त्रियों, धन का हरण कर लेता है, जो अपने मिथ्या अभिमान से अंधों का अपमान करता है वह पुरुष मरकर अगले भव में अंधा होता है। ब्रह्मचारी गज्जू भैया राजेश पंचोलिया एवं परमीत ने बताया कि आचार्य श्री ने प्रकरण को स्पष्ट करते हुए बताया कि व्यक्ति पाप कर्म के उदय से अंधा,विकलांग होता है क्योंकि शरीर में मुख और मस्तक उत्तम कहलाते हैं ,मुख में दोनों नेत्र भी सर्वोत्तम कहलाते हैं नेत्रों के बिना मनुष्य मुनि धर्म अंगीकार नहीं कर सकता है ,और ना ही श्रावक व्रत का पालन कर सकता है क्योंकि नेत्र नहीं होने से जीवों की रक्षा नहीं होती है नेत्र के अभाव में व्यक्ति देव दर्शन, अभिषेक, पूजन स्वाध्याय व्रत धारण नहीं कर सकता है ।इसलिए इन उत्तम कार्यों में बाधा उत्पन्न करने वाले व्यक्ति अगले जन्म में अंधे विकलांग उत्पन्न होते हैंइसी प्रकार लूला ,लंगड़े अपंग होने का कारण बताते हुए आचार्य श्री ने कहा कि जो व्यक्ति स्वार्थ से मनुष्य अथवा पशुओं के हाथ पैर काट देता है अथवा लूले लंगड़े अपंग जीवन को देखकर प्रसन्न होता है वह व्यक्ति वह जीव आगामी भव में लूला लंगड़ा अपंग होता है लूला लंगड़ा अपंग होना तीव्र पाप कर्म के उदय से होता है क्योंकि लूला ,लंगड़ा ,अपंग होने पर व्यक्ति धार्मिक कार्य नहीं कर सकता है इसलिए किसी के अंग को काटना आत्म कल्याण करने वाले तपस्या आदि के कार्यों में बाधा उत्पन्न करना होता है इसलिए आत्म कल्याण चाहने वाले प्राणियों को कभी भी किसी के अंग ,अंग उपांग को छिन्न भिन्न नहीं करना चाहिए अपने समान दूसरे को समझ कर अपनी आत्मा जैसे दूसरो की समझकर सुख पहुंचाने वाले कार्य करना चाहिए आत्म कल्याण का यही सरल उपाय है। समाज अध्यक्ष जयंती लाल कोठरी, बाबूलाल सरिया ने बताया कि आचार्य श्री संघ के 20 वर्षो बाद के प्रवेश की भव्य तैयारी चल रही हैं।जुलूस नगर के मुख्य मार्गो से होते हुए सभी जिनालयों के दर्शन के बाद कार्यक्रम स्थल पर आचार्य संघ का प्रवेश होगा आचार्य श्री की मंगल देशना के पूर्व मंगलाचरण, चित्र अनावरण दीप प्रवज्जलन ,नृत्य मंगलाचरण, आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन, जिनवाणी भेंट,अतिथियों के स्वागत सम्मान, आदि मांगलिक क्रियाएं होगी। राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी।

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