संसार का कोई कार्य नहीं रुकता, कर्ता होने का भ्रम त्यागें: स्वास्तिभूषण माताजी

धर्म

 

संसार का कोई कार्य नहीं रुकता, कर्ता होने का भ्रम त्यागें: स्वास्तिभूषण माताजी

केशवरायपाटन 

संसार का कोई कार्य किसी एक व्यक्ति के रहने या न रहने से नहीं रुकता, इसलिए कर्ता होने का भ्रम नहीं पालना चाहिए। यह बात स्वस्तिभूषण माताजी ने अतिशय क्षेत्र में धर्मसभा में कही।

 

 

 

 

माताजी ने कहा कि द्रव्य छह होते हैं और इन्हीं के माध्यम से संसार का ज्ञान संभव है। हमें जीव का ज्ञान करना है, जो तत्वों के चिंतन से ही प्राप्त हो सकता है। दिगंबर साधु एकांत में जाकर आत्मा की खोज में तत्वों का चिंतन करते हैं और यही वास्तविक साधना है। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया जीव और आत्मा की है। आत्मा ही कर्ता और भोक्ता है, लेकिन मनुष्य अजीव द्रव्यों को अपना मानकर कर्ता होने का भ्रम पाल लेता है। इसे समझाते हुए उन्होंने उदाहरण दिया कि जैसे छिपकली को भ्रम होता है कि वह छत को पकड़े हुए है, जबकि वास्तव में वह स्वयं चिपकी होती है, वैसे ही मनुष्य को भी लगता है कि वह संसार चला रहा है।Hindi health ad banner featuring a climber silhouette, large red headline, a dark blue quotation box with yellow quotation marks, and trays of snacks at the bottom right with contact numbers.Golden advertisement for an 8×10 inch Premium LED Light Frame featuring Buddha and listed features like UV Print, waterproof, and contact info on the postery background.

 

 

 

 माताजी ने कहा कि यह मिथ्यातत्व आत्मा के सम्यक गुणों को नष्ट करता है। संसार के कार्य पहले भी चलते रहे हैं और आगे भी चलते रहेंगे।

मनुष्य को यह समझना चाहिए कि वह भावों का कर्ता है, शरीर का नहीं। शरीर में होने वाले परिवर्तन कर्मों के कारण होते हैं, इसलिए मनुष्य चाहे कितना भी प्रयास कर ले, वह बुढ़ापे को आने से नहीं रोक सकता।

 

      संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

 

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