आचार्य श्री समसागर महाराज से बागीदौरा के 29 वर्षीय परिवार के इकलौते बेटे दिशांत जैन ने सरकारी नौकरी को छोड़कर लिया आजीवन ब्रह्मचारी व्रत 

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आचार्य श्री समसागर महाराज से बागीदौरा के 29 वर्षीय परिवार के इकलौते बेटे दिशांत जैन ने सरकारी नौकरी को छोड़कर लिया आजीवन ब्रह्मचारी व्रत 

  बागीदौरा 

कस्बे के दिशांत जैन ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय राखो बागीदौरा से पुस्तकालय अध्यक्ष की सरकारी नौकरी को छोड़कर 23 अक्टूबर 2025 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में आचार्य श्री 108 समय सागर महाराज से ब्रह्मचारी व्रत लिया।

 

 

 

आचार्य श्री 108 समय सागर महाराज की आज्ञा से बाल ब्रह्मचारी दिशांत मिंटू भैया विधि विधान से आचार्य श्री के संघ में शामिल हुए।

   माता पिता हुए भावुक 

 ब्रह्मचारीदिशांत मिंटू भैया के माता पिता बहुत ही भावुक थे माता सुषमा दोसी, पिता अनिल दोसी, दादा प्यारचंद दोसी एवं दादी कंचन देवी ने बताया कि मोक्ष मार्ग पर जाने की जिद और जुनून के आगे हमने स्वीकृति दी। परिवार की इकलौती बेटी बाल ब्रह्मचारी अवधि दीदी पहले ही ब्रह्मचर्य व्रत ले चुकी हैं।

 

 

   माता-पिता का विवरण 

ब्रह्मचर्य लिए हुए दीदी और भैया के माता-पिता को निंबाहेड़ा में हुए पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था।

 

 

  दिशांत भैया जीवन परिचय 

 

दिशांत भैया का जन्म 10 लक्षण पर्व के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य 29 सितंबर 1996 को जन्मे दिशांत भैया ने अल्प आयु में व्रत लेकर रात्रि में अन्न जल त्याग, बाहरी खाद्य वस्तुओं का त्याग, अष्टमी, चतुर्दशी, एकाशन, नित्य स्वाध्याय किया प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल, और कॉमर्स विषय में अहमदाबाद से ग्रेजुएशन करते हुए प्रतियोगी परीक्षा में लाइब्रेरियन पद पर 2018 में चयन हुआ।

 

दिशांत भैया बताया कि जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में यह क्रिकेट के हरफनमौला खिलाड़ी रहे खुद की बोतल से पानी, चाय, नाश्ता, केवल घर का भोजन लेकर सरकारी सेवाएं दी। 

 

     संघर्ष का गहना है मोक्षमार्ग 

आचार्य श्री ने भी वैराग्य के भावों पर प्रकाश डाला उन्होंने कहा मोक्ष मार्ग संघर्ष का गहना है वैरागी को अपने आप से बहुत संघर्ष करना पड़ता है। परिस्थितिया प्रतिकूल रहती हैं। सभी प्रकार की इंद्रिय सुखों का त्याग करना पड़ता है। वैराग्य के मार्ग में अनेक विपत्तियां विषमताएं एवं बाधा आती हैं। लेकिन धर्म और गुरु के प्रति दृढ़ संकल्प वह समर्पण से वैरागी अपने मार्ग को प्रशस्त कर लेता है। दिशांत का तप,तपस्या, समर्पण, सांसारिक मार्ग को त्याग करना अद्वितीय है। 

            संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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