जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना है, इसके लिए दीक्षा व साधना आवश्यक : मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज 

धर्म

जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना है, इसके लिए दीक्षा व साधना आवश्यक : मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज 

 मधुबन

गुणायतन में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के चौथे दिन तप – कल्याणक का आयोजन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ सम्पन हुआ। प्रातः 5.45 बजे मंगलाष्टक के साथ अभिषेक, शांतिधारा व नित्य पूजन विधिवत संपन्न किया गया। 

 

 

 

इसके बाद संपूर्ण वातावरण धार्मिक मंत्रोच्चारण से गूंज उठा। दोपहर सत्र ना में महाराजा नाभिराय का भव्य एं दरबार सजाया गया।इस दौरान युवराज आदिकुमार के को जीवन प्रसंगों का मंचन किया गया, कर जिसमें विवाह, राज्याभिषेक व राज संचालन के दृश्य प्रस्तुत किए गए। मंचन के माध्यम से धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का सबसे भावुक प्रसंग नीलांजना अप्सरा की असामयिक मृत्यु का रहा। इस दृश्य को देखकर आदिकुमार के मन में गहरा वैराग्य उत्पन्न होता है और वे संसार त्याग कर बन गमन का निर्णय लेते हैं। यह प्रसंग उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक रहा।

 

 

 

 कार्यक्रम की जानकारी देते हुए राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि दीक्षा संस्कार विधि-विधान के साथ सम्पत्र हुआ, 

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 प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी अशोक भैया व ब्रह्मचारी अभय भैया द्वारा विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का मंचन कराया गया। इसमें युद्ध, राज्य संचालन, तथा बाहरी और सुंदरी के माध्यम से अंक विद्या का प्रदर्शन प्रमुख रहा। साथ ही षट्‌कर्म असि, मसि, कृषि, विद्या, वाणिज्य और शिल्प का उपदेश दिया गया। इन प्रसंगों ने जीवन के व्यावहारिक और आध्यात्मिक पक्ष को उजागर किया।

 

 

 

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य जन्म अत्यंत दुर्लभ है और यह ईश्वर का विशेष अवसर है। उन्होंने कहा कि जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना है, और इसके लिए दीक्षा एवं साधना आवश्यक है। मुनि श्री ने स्पष्ट किया कि वास्तविक त्याग श्रीर का नहीं, बल्कि राग-द्वेष, क्रोध, लोभऔर अहंकार का परित्याग है। उन्होंने गृहस्थ जीवन पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए। नियमित स्वाध्याय, ध्यान और णमोकार मंत्र का अभ्यास जीवन को सकारात्मक दिशा देता है। उन्होंने यह भी कहा कि संयमित जीवन ही आत्मिक उन्नति का मार्ग है। 

 

 

 

आगामी कार्यक्रम में 1 मई को आहारचर्या व भगवान के केवलज्ञान की प्राप्ति का आयोजन होगा। इसके पश्चात मुनि श्री की देशना होगी। वहीं 2 मई को मोक्ष कल्याणक मनाया जाएगा, जिसमें भगवान के मोक्ष गमन और अंतिम विधियों का आयोजन संपन्न होगा। इस अवसर पर मुनि संधान सागर महाराज, मुनि सार सागर, मुनि समादर सागर, मुनि रूप सागर सहित संघ के अनेक संत एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरा परिसर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।

 

 

       संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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