ज़िंदगी की बैंक में जब प्रेम और अपनत्व का बैलेंस कम हो जाता है..तो मन की शांति और चेहरे की प्रसन्नता के चेक बाउंस होने लगते हैं..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
परतापुर बांसवाड़ा राजस्थान
अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ परतापुर बांसवाड़ा राजस्थान में विराजमान हैं उनके सानिध्य में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि इसलिए रिश्तों में अपनों के साथ अपनापन बनाए रखें और प्रेम का मधुर स्वाद बाँटते रहें। क्योंकि रिश्ते निभाते समय मुकाबला नहीं किया जाता, उन्हें महसूस किया जाता है।
_आपने ध्यान दिया होगा — अक्सर महिलाओं की प्रवृत्ति अपनी परेशानियों को व्यक्त करके मन हल्का करने की होती है, जबकि पुरुष का मन समाधान खोजने में लग जाता है। इसलिए जब भी रिश्तों में अपनों की बात सुनें, तो सिर्फ ध्यान से सुनें, बीच-बीच में “हाँ”, “हूँ” जैसे संकेत देते रहें, और कभी-कभी छोटे-छोटे वाक्यों से यह जताएँ कि आप समझ रहे हैं। हर बात का तुरंत समाधान देने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि कई बार सामने वाला समाधान नहीं, समझ और साथ चाहता है।




सब बातों का सार यही है —
चाहे रिश्ते घर-परिवार के हों, पति-पत्नी के हों, भाई-बहन, मित्र, गुरु-शिष्य या भक्त-भगवान के हों..रिश्तों की सफलता सही साथी चुनने से नहीं, बल्कि स्वयं अच्छा साथी बनने से होती है…!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
