Group of women in white robes and head coverings standing on a staircase, some holding wooden staffs, indoors for a ceremony.",

आर्यिका श्री विशिष्टमति माताजी ने पाश्चात्य संस्कृति से दूर रहकर धर्म और संस्कार अपनाने का संदेश दिया

धर्म

आर्यिका श्री विशिष्टमति माताजी ने पाश्चात्य संस्कृति से दूर रहकर धर्म और संस्कार अपनाने का संदेश दिया

बड़ोदिया

बड़ोदिया वीरोदय तीर्थ पर आयोजित धर्मसभा में आर्यिका 105 विशिष्टश्री माताजी ने कहा कि समाज तेजी से पाश्चात्य संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहा है। लोग अपनी मूल धार्मिक संस्कृति, संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं।

 

 

 

जीवन को सार्थक, कल्याणकारी बनाना है तो धर्म, संस्कार, आध्यात्मिक मूल्यों की ओर लौटना होगा। माताजी ने कहा कि भारतीय संस्कृति, जैन धर्म की परंपरा त्याग, संयम, अहिंसा, करुणा पर आधारित है। यही संस्कार मनुष्य को महान बनाते हैं।Golden advertisement for an 8×10 inch Premium LED Light Frame featuring Buddha and listed features like UV Print, waterproof, and contact info on the postery background.व्यक्ति सूट में सीढ़ी चढ़ता एक आधुनिक बिल्डिंग पृष्ठभूमि पर, ऊपर लाल हिंदी हेडलाइन वाला विज्ञापन दिख रहा है; बीच में ग्रे बबल में संदेश और नीचे नमकीन के ट्रे के साथ संपर्क नंबर।

 

 

 

 

 

 परिवार में धर्म,संस्कारों का वातावरण रहेगा तो आने वाली पीढ़ी सदाचार, नैतिकता के मार्ग पर चलेगी। घर-परिवार में केवल भौतिकता, दिखावे का माहौल रहेगा तो युवा पीढ़ी अपने मूल से भटक सकती है।

उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ धर्म, संस्कारों की शिक्षा भी दें। बच्चों को मंदिर, तीर्थ, साधु-संतों के सान्निध्य में लाने का प्रयास करें। इससे उनके भीतर आध्यात्मिकता के बीज अंकुरित होंगे। 

 

      संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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