परम पूज्य आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने पंचकल्याण की तप कल्याणक की बेला में किया केशलोच
रामगंजमंडी
10नवंबर प्रातः बेला में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने केशो का लोचन किया। नगर में तप कल्याणक महोत्सव है और गुरुदेव ने उष्ण तप करते हुए स्वयं के हाथों से बिना किसी औजार के केशलोच किया

केशलोच के विषय में प्रकाश डाले तो आपको बता दे दिगंबर संत स्वावलंबी होते है, वे किसी को भी कष्ट न देते हुए स्वयं कीसाधना करते हैं। चाहे कैसा भी कष्ट क्यों न हो, वे समभाव मेंउसे सहन करते हुए मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होते है। केशलोच एक साधना एक तपस्या है बिना किसी औजार के हाथों से केशलोच करना सहज नहीं है।

जैन संतो के मूलगुण में यह एक मूलगुण है। स्वयं के हाथों बिना किसी अस्त्र के अपने हाथों से घास फूस की तरह संत केशो को निकालते हैं जो अपने आप में एक उत्कृष्ट साधना होती है। 

साधना साधना के रास्ते कामना के वास्ते चल दे राही चल जैन संत अहिंसा व्रत के पालन के साथ ही शरीर से राग भाव को भी हटाते हैं।

जब जैन संत स्वयं के हाथों केशलोच करते है तो उनके चेहरे पर मुस्कुराहट देखने को मिलती है। जो अपने आप में पंचम युग में एक उत्कृष्ट साधना है
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312



