हर मास एक उपवास :सोए हुए देश को बाबा रामदेव ने जगायाः आचार्य प्रसन्न सागर पांचवां सामूहिक उपवास संकल्प कार्यक्रम, बाबा रामदेव को अंतर्मना पुरस्कार से नवाजा
बांसवाड़ा राजस्थान।
शहर के लोधा तालाब के पास स्थित रॉयल मेसी हॉल में मंगलबार को हर मास एक उपवास का सामूहिक उपवास संकल्प कार्यक्रम हुआ। इसमें अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज और योग गुरु बाबा रामदेव के सानिध्य में लोगों ने जीवन और मन की दृद्धि के लिए महीने में एक दिन उपवास रखने का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम में भाजपा को राष्ट्रीय उपाध्यक्षा और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुई।
कार्यक्रम में अंतर्मना द्वारा पुरस्कारों की घोषणा से पहले उपाध्याय मुनि पीयूष सागर ने पुरस्कारों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में संस्कार और संस्कृति को सुरक्षित करने के लिए आचार्य ने चारित्र शुद्धि विधान में 1200 से ज्यादा उपवास किए। इसके बाद से शुरुआत हुई।

वहीं, अंतर्मना के पुरस्कार के रूप में बाबा रामदेव के नाम की घोषणा करते हुए आचार्य प्रसत्र सागर बोले कि पूरा देश सोया था, आपने जगा दिया। अब हर गली -मोहल्ले और पार्क में सुबह-सुबह कपात भति और अनुलोम-विलोम की आवाज सुनाई देती है। इनमें हर उम्र के लोग शामिल हैं। ऐसे में अंतर्मना पुरस्कार की सार्थकता के लिए आपसे बेहतर भला और कौन हो सकता है।

कार्यक्रम में मंच पर प्रसिद्ध रामकथा वाचक कमलेश भाई शास्त्री, महामंडलेश्वर स्वामी हितेश्वरानंद सरस्वती, कलासंत मामा सत्य नारायण मौर्य, मोटिवेशनल स्पीकर उजवल पाटनी, पर्यावरणाविद प्रवीण नायक और एसके और पीके तिनारावाला सहित सम्मान के कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

कार्यक्रम में अंतर्मना पुरस्कार सम्मान समारोह अंतर्मना धार्मिक परमार्थिक न्यास की ओर से प्रदान किए गए। कार्यक्रम का आयोजन पवस्टिंग फाउंडेशन चैप्टर बांसवाड़ा और पतंजलि योगपीठ की ओर किया गया। इसमें बांसवाड़ा चैप्टर के सुरेश संघवी, प्रदीप कोठारी अशोक बोरा, प्रणम सरिया, महेंद्र जोरा, शैलेंद्र दोसी, राकेश सराफ, प्रवीण घोड़ा, सनत नश्नावत और पंकज जैन सहित कई सदस्य शामिल थे।
उपवास में ज्यादा खाते हैं: राजे
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि महाराज से मिलने के लिए पिछले तीन महीने से घूम रही थी। आज मौका मिला है। उनके 557 दिनों के उपवास की बात सुनकर ही प्यास लग गई। राजे ने कहा कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उपवास जरूरी है। शरीर ठीक नहीं तो कुछ भी नहीं है।
उन्होंने उपवास पर बोलते हुए कहा कि आजकल लोग उपवास में फलाहारी के नाम पर सामान्य दिनों से ज्यादा व्यंजन खा जाते हैं। शरीर भी सफाई के साथ अपने मन की सफाई कैसे करनी है, यह हमें तपस्वी संतों से सीखने को मिला।
कार्यक्रम में देशभर से चुने हुए गणमान्य व्यक्तियों को उनके सेवा, करुणा, विशिष्ट ज्ञान और तप-साधना के क्षेत्र में पुरस्कृत किया गया। इनमें तपस्वी सम्राट आचार्य सन्मति सागर सेवा पुरस्कार यूपी के पूर्व आईएएस दुर्गा शंकर मित्रा, आर्यिका सुपाश्र्वमति वशिष्ठ पुरस्कार निजी चैनल के निदेशक सुप्रिय प्रसाद, आर्थिका पवाची करुणा पुरस्कार कविश्रेष्ठ डॉ. हरिओम पंवार और पहली बार अंतर्मना साधना महोदधि पुरस्कार योग गुरु बाबा रामदेव को प्रदान किया गया। सभी को दिव्य चिह्न, प्रशस्ति पत्र और 2.51 लाख रुपए की सम्मान राशि भेंट की गई।
यहां से मेरा रिश्ता मामा-भांजे का है: योगगुरु बाबा रामदेव
बाबा रामदेव ने कहा कि जीते जी मुक्ति देखनी हो तो दिगंबर को देख लो। उन्होंने कहा कि शरीर और मन का डिसिप्लेन जरूरी है। एक क्षण भी गलत विचार और एक कण भी गलत आहार शरीर के भीतर नहीं पहुंचे। इसके लिए तन और मन को साधकर रखना चाहिए। क्योंकि मन में विचारों को, दिल में भावनाओं की और पेट में आहार की भीड़ भरी रहती है। ज्यादा खाने से ज्यादा ताकत आती है, अपने दिमाग को इस प्रोग्रामिंग को पहले ठीक करना होगा। उन्होंने कहा कि सभी को सूर्यास्त से पहले भोजन करने की आदत डालनी चाहिए। राजस्थान को लेकर कहा कि यह धरती शौर्य, वीरता और धार्मिकता से ओतप्रोत है। यहां से मेरा रिश्ता मामा-भांजे का है क्योंकि यहां मेरा ननिहाल है।
उन्होंने योग के बारे में बताते हुए कहा कि एक बार बहन सिंधिया को चिकनगुनिया हो गया था, तो हमने गिलोय पिलाकर उन्हें ठीक कर दिया था। कई लोगों के कैंसर जैसी बीमारी लौकी और उबली हुई सब्जियां खिलाकर दूर कर दी। इसके लिए विदेशों से लोग आ रहे हैं।
प्रचार प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
