मुनिश्री 108 प्रमाण सागर महाराज तीर्थराज श्रीसम्मेद शिखर के लिए मंगल विहार जीवन में मंगल तभी आता है जब मन निर्मल और वाणी सरल हो : मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज 

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मुनिश्री 108 प्रमाण सागर महाराज तीर्थराज श्रीसम्मेद शिखर के लिए मंगल विहार जीवन में मंगल तभी आता है जब मन निर्मल और वाणी सरल हो : मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज
रांची
पंचकल्याणक के लिए रांची आए मुनिश्री 108 प्रमाण सागर महाराज तीर्थराज श्रीसम्मेद शिखर के लिए मंगल विहार कर गए। रात्रि विश्राम पंचरतन विहार में करने के बाद 8 अप्रैल को उनकी आहार चर्या कूटे में रामपाल गंगवाल के बगीचे में होगी। मुनिसंघ का 12 अप्रैल को गोमिया में मंगल प्रवेश होगा। 15 अप्रैल को मुनिसंघ की मंगल अगवानी पारसनाथ में होगी।

 

 

उनका मंगल विहार सुबह 7 बजे बिरसा मुंडा फन पार्क से हुआ। विहार के दौरान रांची, कुनकुरी, रामगढ़ और शिखरजी से आए भक्तों ने उनके साथ विहार किया। रांची से मंगल विहार करने से पहले मंगल प्रवचन में कहा कि मनुष्य जब बाहरी आकर्षणों से हटकर अंतर्मुखी होता है, तभी उसके भीतर अध्यात्म का सच्चा प्रकाश पैदा होता है।

मुनिश्री ने बताया कि क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार यह चार बंदिशें आत्मा को जकड़कर रखती हैं और साधना का अर्थ है इन बंधनों से मुक्ति मिलना।

 

उन्होंने कहा कि पंचकल्याणक का हर दिन आत्म जागरण की याद दिलाता है। जब मन स्थिर हो जाता है और विचार पवित्र हो जाते हैं, तब जीवन सहज रूप से शांति और संयम की ओर चलता है। जीवन को आगे बढ़ाने के लिए हमें दोषों और दुर्बलताओं से मुक्त होना जरूरी है। प्रतिदिन किसी न किसी ऐसी दुर्बलता की चर्चा सबके बीच हो रही है जो हमारे व्यक्तित्व को कमजोर बनाती है और जिससे हमारे जीवन का आंतरिक और बाह्य विकास अवरूद्ध होता है।

 

जब तक पक्षपात होगा भेदभाव बना रहेगा
मुनिश्री ने कहा कि पक्षपात मतलब भेद‌भावपूर्ण नीती। यह पक्षपात जहां भी हो व्यक्ति को अंदर से तोड़ती जब तक पक्षपात होगा भेदभाव बना रहेगा। प्रेम सौजन्य और सौहार्द को टिका पाना बहुत कठिन है। हमारे संत कहते हैं घर-परिवार हो या लोक व्यवहार पक्षपात की वृत्ति से ऊपर उठकर चलो, क्योंकि यह तुम्हारी प्रगति में बाधक है। चार स्तर पर जैसे पक्षपात करना, पक्षपात होना, पक्षपात दिखाना और पक्षपात से मुक्त निष्पक्ष रहना। कई बार ऐसा देखने में आता है कि लोग एक-दूसरे का पक्षपात करते हैं। घर परिवार में ऐसा ज्यादा देखने में आता है। किसी एक के प्रतिविशेष झुकाव औरों के लिए अलगाव उत्पन्न कर देता है। पक्षपात ठीक नहीं है यह जीवन में बहुत बड़ा बाधक है। जीवन में संतुलन बनाकर चलने से प्रगति निरंतर होगी और उसको गौण करके चलने से मार्ग वही अवरुद्ध होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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