अहिंसा दृष्टिकोण बन जाए तो जीवन स्वतः श्रेष्ठ बन जाता है : मुनिश्री प्रमाण सागर|
रांची
पंचकल्याणक महोत्सव की पूर्व संध्या पर मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि यदि अहिंसा दृष्टिकोण बन जाए तो जीवन स्वतः श्रेष्ठ बन जाएगा। पंचकल्याणक महोत्सव स्थल बिरसा फन पार्क के विशाल पंडाल में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए प्रातः कालीन प्रवचन में महाराज ने आत्म शुद्धि, अहिंसा और संयम को जीवन का अनिवार्य आधार बताया।
मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य का उत्थान बाहरी उपलब्धियां से नहीं, बल्कि अपने अंतर मन की निर्मलता से होता है। अहिंसा केवल एक व्यवहार नहीं, बल्कि जीवन जीने का दृष्टिकोण है। जब मनुष्य के अंदर कठौता ईर्ष्या और राग द्वेष समाप्त होते हैं, तभी उसके जीवन में शांति और स्थिरता का उदय होता है। 
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का उल्लेख करते हुए मुनिश्री ने कहा कि यह उत्सव उत्कृष्ट आचरण और आत्म जागरण का संदेश देता है। पंचकल्याणक केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्म निर्माण का मार्गदर्शन है। युवाओं का ध्यान आकृष्ट करते हुए मुनिश्री ने कहा कि नैतिकता अनुशासन और सकारात्मक सोच किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला है।
पंचकल्याणक के सभी पात्रों और भगवान के माता-पिता बने विमल सोगानी और सरिता सोगानी का सम्मान किया गया, उन्हें मेहंदी लगाकर रस्म पूरी की गई।
मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज के सानिध्य में बिरसा मुंडा के फन पार्क में बुधवार से छह दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव शुरू हो रहा है।
मुनिश्री ने कहा कि दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसका समाधान नहीं है। महाराज श्री ने अहिंसा संयम और सद्भावना का संदेश देते हुए कहा कि इसे घर-घर पहुंचने की जरूरत है।
मेहंदी लगाकर भगवान के आने की मनाई खुशी
पंचकल्याणक की पूर्व संध्या पर आयोजन स्थल पर सामूहिक मेहंदी
रचाओ कार्यक्रम हुआ। दिगंबर जैन समाज की महिलाओं ने हाथों पर मेहंदी और माथे पर हल्दी के तिलक लगाकर भगवान के आगमन का अनुष्ठान किया। भगवान के मां के गर्भ में आने की खुशी पर समाज की महिलाओं ने एक-दूसरे को मेहंदी लगाकर खुशी जाहिर की और मंगल कामना की। बिरसा फन पार्क में आयोजित कार्यक्रम में समाज की महिलाओं ने पंचकल्याणक में बन रही इंद्राणियों को भी मेहंदी लगाई। घरों में भी मेहंदी लगाकर खुशी जाहिर की गई।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
