प. पू. भारत गौरव श्रमणी गणिनी आर्यिका रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी का आज चित्रकूट कालोनी जयपुर में हुआ भव्य मंगल प्रवेश*
सांयकाल मधुबन कॉलोनी पारसनाथ जैन मंदिर में तीन संघों का हुआ भव्य मिलन
गुरुओं के चरण धुलाने से अपना बुरा आचरण भी धुल जाता है एवं उस गंधक को अपने मस्तक पर चढ़ाने से मंगल ही मंगल होता है*
*आर्यिका विज्ञा श्री*
जयपुर/
भारत गौरव गणिनी आर्यिका रत्न 105 विज्ञा श्री माताजी का आज चित्रकूंट कालोनी सांगानेर जयपुर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ, जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने बताया कि पूज्य माताजी की समाज द्वारा बैंड बाजों से भव्य अगवानी की गई और सभी भक्तों ने मिलकर पाद प्रक्षालन एवं मंगल आरती करके अपने आपको धन्य किया। तत्पश्चात चित्र अनावरण , दीप प्रज्ज्वलन व शास्त्र भेंट के बाद पूज्य गुरुमाँ ने चरणोदक (गंधोदक) का महत्व बताते हुए कहा कि – गुरुओं के चरण धुलाने से अपना बुरा आचरण भी धुल जाता एवं उस गंधोदक को अपने मस्तक पर चढ़ाने से मंगल ही मंगल होता है। साथ ही गुरु माँ ने उद्बोधन में ईर्ष्या करने से होने या मिलने वाले फल को एक कथा के माध्यम से समझाते हुए कहा कि – एक बार की बात है , एक गुरु अपने शिष्यों को अध्धयन पूरा कराने के बाद संबोधित कर रहे थे उन्होंने सभी शिष्यों को अंतिम सीख देने के लिए अपने पास बुलाया उन्होंने सभी से कुछ टमाटर लाने के लिए कहा सब शिष्य टमाटर लेकर आ गए अब गुरु ने उनसे कहा कि याद करो , तुम्हारे मन में किन-किन लोगों के प्रति ईर्ष्या है, जिन जिन के प्रति ईर्ष्या है , उन सब के नाम इन टमाटरों पर लिख दो, शिष्यों को गुरु जी की बात थोड़ी अटपटी लगी , लेकिन फिर भी गुरुजी की बात तो सबको माननी ही थी शिष्यों को जिन – जिन से भी ईष्या थी, उन्होंने उनके नाम टमाटरों पर लिख दिए अब गुरु जी ने कहा कि इन टमाटरों को हमेशा अपने साथ रखना । सभी शिष्यों ने ऐसा ही किया लेकिन एक-दो दिन बाद टमाटरों से बदबू आना शुरू हो गई। टमाटर सड़ने लग गये जब शिष्य बदबू नहीं सह सके , तो सब के सब गुरुजी के पास पहुँच गए वे सभी बोले कि गुरुदेव यह आपने हमसे क्या करने को बोला है ? इन टमाटरों का क्या करना है ? इनको साथ रखने से तो बड़ी बदबू हो रही है , घुटन हो रही है, हम इन्हें अपने साथ क्यों रखें ? गुरुजी ने कहा – बस यही हमारी सीख है , जो मैं आप सभी को देना चाहता था, जैसे इन टमाटरों पर उन लोगों के नाम लिखने से जिनसे तुम्हें ईष्या है, तुम्हें घुटन की अनुभूति हो रही है वैसे ही अपने चित्त में उन लोगों का नाम चिपका कर रखोगे , तो जीवन भर घुटन होगी । अगर स्वयं को घुटन से मुक्त रखना चाहते हो , तो ईष्या के भाव को छोड़ो। यह अंदर से घुटन देने वाली है , तकलीफ देने वाली है , परेशान करने वाली प्रवृत्ति है। इस प्रवृत्ति से जब मुक्त हो जाओगे , तो अपने जीवन को सफलतम बना पाओगे ।
आप सभी अपने मन से ईर्ष्या जैसे कचरें को बाहर निकालकर क्षमा रुपी जल को अपने में समाये। इस पखवाड़े में शांतिनाथ विधान आपके जीवन में सुख – शांति – समृद्धि लाये।
आर्यिका संघ का सांयकाल 6बजे चित्रकूट कॉलोनी से विहार होकर मधुबन कॉलोनी में भव्य मंगल प्रवेश हुआ जहां स्वस्ति भूषण माताजी,भरतेश्वरमती माताजी, से विज्ञा श्री माताजी स संघ का भव्य मिलन हुआ ।

*राजाबाबू गोधा जैन महासभा मीडिया प्रवक्ता राजस्थान*
