श्याम टाकीज से डी. एन जैन कांलेज मार्ग” अब संत प्रमाणसागर महाराज के नाम से जाना जाएगा संत को किसी नाम की आवयश्कता नहीं होती”-मुनि श्री प्रमाणसागर

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श्याम टाकीज से डी. एन जैन कांलेज मार्ग” अब संत प्रमाणसागर महाराज के नाम से जाना जाएगा संत को किसी नाम की आवयश्कता नहीं होती”-मुनि श्री प्रमाणसागर

      जबलपुर 

आज जैन जगत के लिए एक हर्षदायक सूचना मिली जो गौरव के पल कहे जाएंगे जी हा श्याम टाकीज से डी. एन जैन कांलेज मार्ग” अब संत प्रमाणसागर महाराज के नाम से जाना जाएगा”उपरोक्त घोषणा नगर निगम के महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू,निगम अध्यक्ष रिंकू व्रिज तथा एम.आई.सी.सदस्य सुभाष तिवारी एवं पार्षद अतुल तिवारी ने आकर गुरुदेव के चरणों में आकर नमोस्तु निवेदित करते हुये घोषणा की। 

 

इस अवसर पर मुनि श्री ने सभी को आशीर्वाद देते हुये कहा कि संत को नाम की कोई आवश्यकता नहीं रहती लेकिन संत के नाम से यदि आपकी भाव विशुद्धि बढ़ती है तथा भावनायें पवित्र होती है तो मुझे कोई आपत्ती नहीं। उन्होंने सभी को आशीर्वाद देते हुये कहा कि लोक में जो नाम प्रचलित है उनके नामों में तथा भगवान का नाम में बहुत अंतर होता है।भगवान का नाम लैनै से कर्म कटते है!

 

 

 

यह कोई कोरी अवधारणा नहीं है यह तो जीवन का विज्ञान है, उन्होंने कहा कि”भगवान का नाम हमारे हृदय मे एक प्रकार से अलग स्पंदन करता है,और जैसे ही हम नमो या नमस्कार शब्द का उच्चारण करते है,तो मस्तिष्क में एक तरंग उठती है जिससे अल्फा बीटा तरंग कहते है,जैसे हमारे भाव उत्पन्न होते है,वह हमारे हृदय में विशेष रुप से आनंद की उत्पत्ति करते है,जिससे हमारे शरीर की अंतःस्रावी ग्रंथियों में परिवर्तन आता है,और शरीर के रसायन बदल जाते है।

 

 

 

मुनि श्री ने कहा”कर्म और आत्मा” के संबंधों में एक प्रकार से रासायनिक संबंध है, जब हम भगवान की भक्ती में डूब जाते है तो जो कर्म हमारी आत्मा के साथ चिपक जाते है वह अपने आप अलग हो जाते है इसलिये भगवान के नामों का स्मरण कर्म निर्जरा का साधन है यह अवधारणा नहीं विज्ञान है” भगवान का नाम लेंना तभी सार्थक होता है,जब हम बाहर और अंदर से भक्ती में एकमेव हो जाते है,सभी को एक ही भावना रखना चाहिये प्रभु आपका नाम “मेरी हर पल आती और जाती सांसों में समा जाये,जिस सांस के साथ भगवन् आपका नाम जुड़ जाता है,वह सांस सार्थक हो जाती है”और बाकी सभी सांसें निरर्थक हो जाती है”

राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं स्थानीय प्रचार मंत्री सुबोध जैन कामरेड ने बताया श्री सिद्धचक्र विधान के अंतिम दिवस दर्शनार्थियों की भारी भीड़ थी संपूर्ण जबलपुर तथा आसपास के शहरों से श्रद्धालुओं के आने का क्रम बना रहा मुनि श्री के मुखारविंद से संस्कृत भाषा में भगवान के सहस्त्र नामों का उल्लेख करते हुये1024 अर्घ समर्पित किये गये।

 

श्री जैन ने बताया 8 फरवरी रविवार को प्रातः6 बजे से मांगलिक क्रियायें प्रारंभ हो जाएगी भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा के उपरांत नित्यनियम पूजन एवं हवन होगा तत्पश्चात 8:30 बजे से चांदी के तीन रथ एवं122 चांदी की पालकी में श्री जिनेन्द्र देव विराजमान रहेंगे उनको श्रद्धालु अपने कांधे पर लेकर चलेंगे भगवान जिनेन्द्र देव की इस भव्य शोभायात्रा संस्कार धानी जबलपुर के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़कर जाएगी। जिनेन्द्र देव की रथयात्रा एवं पालकी यात्रा गड़ा फाटक-बड़ा फुहारा- लार्डगंज- रानीताल चौक से वापिस कार्यक्रम स्थल टेलीग्राफ ग्राउंड पर आएगी यंहा भगवान का अभिषेक एवं मुनि श्री के आशीर्वचन होंगे। सांयकाल5:45 से शंकासमाधान कार्यक्रम आयोजित होगा।

      संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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