सकल दिगंबर जैन समाज ने रामगंजमंडी दिगंबर जैन मंदिर के जीणोद्धार कराए जाने एवम 6 लोगों को अभियुक्त बनाए जाने के विरोध में उप जिला कलेक्टर महोदय को दिया ज्ञापन 

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सकल दिगंबर जैन समाज ने रामगंजमंडी दिगंबर जैन मंदिर के जीणोद्धार कराए जाने एवम 6 लोगों को अभियुक्त बनाए जाने के विरोध में उप जिला कलेक्टर महोदय को दिया ज्ञापन 

रामगंजमंडी 

सकल दिगंबर जैन समाज रामगंजमंडी द्वारा श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर रामगंजमंडी के जीणोद्धार कराए जाने एवं 6 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को अभियुक्त बनाए जाने के विरोध में सकल दिगंबर जैन समाज ने प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन दिया वर्तमान में दिगंबर जैन समाज के 1200 सदस्य हैं जिसमें से 800 सदस्यों की लगभग इसमें सक्रियता रही जो यह दर्शा रही थी कि इस कृत्य से समाज कितना आक्रोशित है।

 

 

  श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर से समाज बंधु जुलूस के रूप में न्यायालय पहुंचे और उप जिला कलेक्टर को ज्ञापन प्रस्तुत किया। 

इस बेला में समाज बंधुओ में काफी आक्रोश दिखा और उनका कहना था कि जिन 6 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है वह समाज की सेवा में सदा सक्रिय रहते हैं और कार्य करते रहते हैं। 

 

 

सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से ज्ञापन देते हुए कहा गया कि बाजार नंबर एक रामगंजमंडी में शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर निर्मित है इतिहास के अनुसार यह मंदिर फर्म श्री नाथूराम जोरजी प्यार कुंवर बाई द्वारा निर्मित किया गया है और उनके द्वारा ही मूल मंदिर का निर्माण किया गया है और समय अनुसार अन्य वेदियों का निर्माण समाज द्वारा कराया गया है। अतः यह किसी व्यक्ति विशेष की निजी संपत्ति नहीं है। 

 

 

श्रीमती प्यार कुंवर बाई के द्वारा मंदिर की समस्त व्यवस्था सेवा पूजा रखरखाव एवं जीर्णोद्धार के संबंध में प्रबंधन हेतु सुचारू रूप से इसकी आमदनी के उपयोग के लिए अपने जीवन काल में समाज के प्रतिनिधि व्यक्तियों को ट्रस्टी भी नियुक्त किया गया था। परंतु प्रारंभ से ही मंदिर जी का प्रबंध एवं संचालन समाज के द्वारा ही किए गए। और दान की राशि से ही होता चला आ रहा है। यह ट्रस्ट श्रीमान सहायक आयुक्त देवस्थान विभाग उदयपुर एवं कोटा में पंजीकृत ट्रस्ट है। और ट्रस्ट के पंजीकरण संख्या 220 दिनांक 31 12 1975 से है। 

 

 

श्रीमती प्यार कुंवर बाई द्वारा ट्रस्टी नियुक्त करने के बाद से दिनांक 31 द्वारा 1962 को अपनी ओर से आलेखित प्रपत्र में उक्त संपत्ति में उनके एवं फर्म नाथूराम जोरजी के संपूर्ण अधिकार स्वत समाप्त हो गए हैं और संपूर्ण अधिकार ट्रस्टों को दिए जा चुके हैं। 

 

लिखे गए परिपत्र में श्रीमती प्यार कुंवर बाई द्वारा ट्रस्ट की संपत्ति में निर्मित दुकानों से होने वाली आय का उपयोग ठाकुर जी की सेवा पूजा उत्सव आदि में अथवा मंदिर के जीर्णोद्धार और अधिकार निर्माण में की जाएगी। 

 

 वर्तमान में मंदिर में विराजमान श्री शांतिनाथ जी कुंथुनाथ जी भगवान की प्रतिमा खंडित हो चुकी है खंडित मूर्तियों के फोटो के साथ ज्ञापन संलग्न किया गया है जैन धर्मालंबी एवं सम्माननीय साधु संतों द्वारा समय-समय पर विचार व्यक्त किया जाता रहा है कि किसी भी पूजा स्थान में खंडित मूर्ति नहीं होना चाहिए और यदि कोई खंडित मूर्ति है तो उसका जीर्णोद्धार कराया जाना चाहिए यदि संभव नहीं है तो नवीन मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कराई जाने का प्रावधान है। 

 

     पूज्य मुनि द्वय की प्रेरणा से सभी समाज बंधुओ ने मंदिर जीर्णोद्धार की स्वीकृति दी 

    मंदिर में स्थापित मूर्ति के जीर्णोद्धार के बारे में वर्तमान में रामगंजमंडी के प्रवास पर विराजित आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की परम शिष्य परम पूज्य मुनि श्री 108 निष्पक्ष सागर महाराज, परम पूज्य मुनि श्री 108 निष्प्रह सागर महाराज जी से विचार विमर्श करने पर उन्होंने भी जीर्णोद्धार को धर्मानुकूल बताते हुए सहमति व्यक्ति की और इस समस्त कार्यवाही में संपूर्ण समाज ने लिखित में अपनी सहमति दी। और हस्ताक्षर किए।

 

 

नाथूराम जोरजी ट्रस्ट के प्रतिनिधि अथवा कर्ता विगत कई वर्षों से रामगंजमंडी के स्थाई निवासी रहे हैं स्वर्गीय मुकेश कुमार रावका अपने जीवन काल में ही स्थाई रूप से मुंबई और कोटा निवास करते रहे और नमन रावका कभी भी रामगंजमंडी का स्थाई निवासी नहीं रहा है और ना ही नमन रावका जन्म स्थान रामगंज मंडी रहा है। नमन रावका शुरू से ही मुंबई और कोटा निवासी रहा है। 

 

 

 

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि जब नमन रावका रामगंजमंडी निवास ही नहीं कर रहे हैं तो समाज के व्यक्तियों द्वारा किस प्रकार उनकी शांतिभंग होने की संभावना है इस तथ्य को उनके द्वारा किसी भी प्रकार से स्पष्ट नहीं किया गया है और ना ही उनकी शांतिभंग होने के समर्थन में कोई साक्ष्य अथवा शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया है। उनकी ओर से प्रस्तुत कार्रवाई से स्पष्ट है कि समाज के व्यक्ति जो रामगंजमंडी के प्रतिष्ठित व्यापारिक घरानो के धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन में सहभागिता रखते हैं ऐसे व्यक्तियों से किसी भी प्रकार की शांति भंग होने की संभावना का प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता। 

 

ज्ञापन में लिखा गया की समस्त कारणों से श्रीमान से यह निवेदन करना आवश्यक हो गया है कि नमन रावका द्वारा श्रीमान उपखंड अधिकारी एवं उप जिला मजिस्ट्रेट रामगंज मंडी के समक्ष प्रस्तुत की गई कार्यवाही अंतर्गत धारा 126 170 बी एन एस एस प्रकरण संख्या 263/2026 को पूर्णतया निरस्त किया जाना आवश्यक हो गया है। 

 

अतः ज्ञापन प्रस्तुत कर निवेदन है कि ज्ञापन में वर्णित समस्त तथ्यों को मध्य नजर रखते हुए श्रीमान से अपेक्षा की जाती है कि उचित कार्यवाही अमल में ले जाने हेतु समुचित आदेश प्रदान करें। 

 

  6 धर्मनिष्ठ व्यक्तियो समाज के सक्रिय व्यक्तियों को अभियुक्त बनाए जाने का समाज बंधुओ ने किया विरोध 

 

मंदिर निर्माण के संबंध में छह धर्मनिष्ठ व्यक्ति जिसमें श्री प्रकाश विनायका, चेतन बागड़ियां, धर्मेंद्र लुहाड़िया, राजीव बाकलीवाल, सुरेश बाबरिया, राकेश बाकलीवाल को नमन रावका द्वारा अभियुक्त बनाया गया जिसका सकल दिगंबर जैन समाज रामगंजमंडी ने उग्र प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन देते हुए अपना विरोध दर्ज किया। और कहां की इन 6 लोगों को अभियुक्त नहीं बनाया जाना चाहिए यह लोग समाज की सेवा में अपना अमूल्य योगदान देते हैं एवं दूर-दूर तक का अनुदान देते हैं। ऐसा किया जाना दोषपूर्ण है आपको बता दें कि की गई कार्रवाई के संबंध में मौजूद रामगंजमंडी के मौजूद ट्रस्टी महोदय ने हस्ताक्षर करते हुए नमन रावका द्वारा की गई कार्यवाही को निराधार बताया और कहा कि श्री नमन रावका द्वारा 16 मार्च 2026 को एक परिवाद उप जिला मजिस्ट्रेट रामगंजमंडी में दिया गया इस परिवाद में समाज के गणमान्य 6 व्यक्तियों को अभियुक्त मानते हुए अत्यंत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। 

 

 

इस संबंध में नाथूराम जोरजी प्यारकुंवर बाई ट्रस्ट के सभी ट्रस्टीगण यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि उपरोक्त सभी वरिष्ठ महानुभव जिन्हें आरोपित माना गया है वह सभी समाज के अत्यंत सभ्य एवं प्रतिष्ठित लोग हैं। उन्होंने सदैव समाज एवं मंदिर जी में अपनी सेवाएं प्रदान की है उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप निराधार है। कृपया हमारे स्पष्टीकरण को तुरंत संज्ञान में लाए

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